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शनिवार, 5 दिसंबर 2020

G.B ROAD PART 2 HINDI KAHANI | गली नम्बर 64 कहानी | G.B Road par kahani | LOVE STORY ON G.B ROAD | व्यश्या पर कहानी

                                     कहानी

                    G.B ROAD जी . बी रोड

(अभी तक इस कहानी में आपने पढ़ा की किस तरह नज़ीर G.B Road पर अपने रिक्शे को मोड़ता है और कॉलेज में उसकी मुलाकात आरती से होती हैं मजहबी दंगे में कैसे दोनो बिछड़ जाते हैं और सरकार द्वारा एक कड़ा फैसला)

                                           भाग 2
                                        (अब आगे)

इस फैसले ने देश की हालत को और भी नाजुक बना दिया था चारो तरफ आवाम में कत्लेआम हो रहा था नज़ीर की हालत दिन बा दिन खराब हो रही थी वो हर रोज कालेज जा कर रोशन चाचा(गेटमैन) से पूछा करता था चाचा आरती आयी थी क्या ,कुछ पता चला उसका,एक दिन रोशन चाचा(गेटमैन) ने नज़ीर से कहा,आरती का पता तो मैं लेना भूल गया बेटा लेकिन उसे मैने दो रोज पहले लाइब्रेरी की तरफ जाते हुए देखा था,उस वक़्त मेरे जेहन में नही आया कि मैं उससे उसका पता मांग लूं और तुम्हारे बारे में बताऊं,इतना सुनते ही नज़ीर लाइब्रेरी की तरफ भागता है पर लाइब्रेरी में ताला लगा हुआ था।
नज़ीर बेवजह दरवाजे को थपथपाने लगता है तभी एक कोने से आवाज आती है,अरे कौन है भाई,आवाज सुनते ही नज़ीर पीछे की ओर घूमता हैं तो सामने लाइब्रेरियन खड़ा था वो नज़ीर से कहता है अरे नज़ीर क्यूँ दरवाजा तोड़ रहे हो क्या बात है और क्या हालत बना रखी है तुमने अपनी,नज़ीर घबराते हुए लाइब्रेरियन से पूछता है सर क्या मुझे आरती का पता मिल सकता है हां क्यूँ नही तुम अंदर तो आओ,लाइब्रेरियन अपने रजिस्टर में आरती का पता ढूंढने लगता है और इतेफाक से दो दिन पहले की एंट्री में आरती का पता नज़ीर को मिल जाता है नज़ीर अपने कांपते हुए हाथों से एक पन्ने पर आरती का पता लिखता है और Thanks Sir बोलकर चला जाता है।
नज़ीर कई दिनों तक आरती का पता लिए उसे ढूंढता रहा था,आखिर कर एक महीने बाद नज़ीर को आरती के घर का पता चल ही जाता है नज़ीर,आरती के घर के सामने  खड़ा था वो अपने जेब से एक कागज का टुकड़ा निकलता है जिस पर आरती के घर का पता लिखा हुआ था उसे देखकर नज़ीर घर के नेमप्लेट को देखता है पता वही था जो नज़ीर के पास था वो आगे बढ़कर दरवाज़े को खटखटाने लगता है दरवाजा थोड़ी से बाद खुलता है।
 दरवाजें पर एक (30) साल की लड़की नज़ीर से कहती हैं जी कहिये,नज़ीर घबराते हुए अपने हाथों में लिए हुए कागज के टुकड़े को उस लड़की को देते हुए बोलता है,ये पता यहीं का हैं,जी हां यहीं का है पर आपको किससे मिलना है,मैडम मुझे आरती से मिलना था दरवाजे पर खड़ी लड़की को बड़ी हैरानी होती है और वो नज़ीर से कहती है क्या मैं आपका शुभ नाम जान सकती हूं,मैं नज़ीर हूँ और आप कौन? मैं आरती हूँ ,नज़ीर कहता है पता तो ठीक है ना,जी बिल्कुल सही पता है पर मेरे सिवा यहां कोई और आरती नही रहती,नज़ीर उस लड़की से कागज का टुकड़ा लेता है और अपने रिक्शे को लेकर घर चला जाता है,नज़ीर की हालत अब बात से बत्तर होती जा रही थी दूसरी तरफ पूरे मुल्क में कर्फ्यू लग चुका था और दिल्ली की तो हालत ना पूछिये बड़ी नाजुक बनी हुई थी जो पैसे नज़ीर ने कॉलेज की फीस के लिए इकट्ठा कर रखा था वो भी अब खत्म हो चले थे लोगों का आवागमन बंद होने से नज़ीर को अब सवारी भी बड़ी मुश्किल से मिल रही थी।
15 जनवरी 1993 रात के 12 बजके 30 मिंट हुए थे तभी  किसी ने नज़ीर का दरवाजा खटखटाया,नज़ीर ने अंदर से आवाज लगाई कौन है भाई,बाहर से आवाज आई मैं सचिन गंगवार एक प्रेस रिपोर्टर हूँ अभी नज़ीर जल्दी से दरवाजा खोलता है,जी कहिये क्या मदद कर सकता हूँ मैं आपकी,क्या मुझे G.B ROAD तक छोड़ सकते हो,नज़ीर कहता है इस वक़्त और ऐसे माहौल में ,तभी रिपोर्टर, तुम उसकी चिंता मत करो मै हूँ तू बस ना मत करो,नही तो मैं किसी को इंसाफ नही दिला पाऊंगा,नज़ीर,फिर तो ज़रूर चलूंगा, वो कंबल ओढ़ता है और कमरे को ताला लगाकर नज़ीर रिपोर्टर को अपने रिक्शे पर बिठाकर G.B ROAD की तरफ चल देता हैं जैसे ही नज़ीर रिक्शे को गाली नम्बर 64 की तरफ मोड़ता हैं तभी रिपोर्टर.........

                               (भाग 2 समाप्त)

          (आगे की कहानी के लिए बने रहिये मेरे साथ)

           दिनाँक 01 दिसम्बर 2020  समय 11.00 रात
                                                रचना(लेखक)
                                            सागर(गोरखपुरी)





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