Hello friends my name is Amit Kumar Sagar and I am a government employee, with this platform, I will tell my thoughts, my poems, stories, shayari, jokes, articles, as well as my hobbies.

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मंगलवार, 29 सितंबर 2020

सितंबर 29, 2020

हिंदी कहानी लॉकडाउन भाग 2 | 72 घंटे लॉकडाउन के हिंदी कहानी | सम्पूर्ण लॉकडाउन कहानी इन हिंदी |Complete lockdown story in hindi |

                                  हिंदी कहानी

                       लॉकडाउन Lockdown

                                       भाग 2



(अभी तक इस कहानी में आपने पढ़ा कि आलोक के मकान मालिक ने उसे मकान खाली करने को कहता है और आलोक गाड़ी की तलाश में घूम कर कमरे के बाहर बैठ जाता है)

                                    "अब आगे"

नही मिली कोई गाड़ी कहकर आलोक रोने लगता है।
सिमा ने कहा क्यों रोते हो सब थीक हो जायेगा तुम पहले  अंदर चलो इतना कहते ही आलोक कमरें की तरफ चल देता है सिमा तौलिये से उसके बालों को सुखाने लगती है आलोक की आंखें भर आईं थी वो सिमा के कमर से लिपटकर रोने लगता है तभी सिमा अपने आपको संभालते हुए अपने साड़ी के पल्लू से उसके आँशु पोछने लगती है वो आलोक से कहती है चलो अब जल्दी से तुम अपने कपड़े बदल लो नही तो तुम्हे ठंड लग जाएगी आलोक उठता है और अपने कपड़े बदलने चला जाता है आलोक जब कपड़े बदल के वापस आता है तब तक सिमा आलोक के लिए अदरक वाली चाये बनाकर उसका इन्तेज़ार करती है।
आलोक थोड़ा मायूस सा था तभी सिमा ने कहा हमें एक बार फिर मकान मालिक से बात करनी चाहिए आलोक ने कहा कोई फायदा नही वो मानेगा नही सिमा ने कहा फिर भी एक बार कोशिश कर के देख लेते है पर इतनी बारिश में जाएंगे कैसे अब तो छाता भी टूट गया है और कवीर का क्या करें तभी सिमा ने कहा मैं कुछ करती हूं।
सिमा कमरें के अंदर से प्लास्टिक का एक बड़ा सा टुकड़ा  ले आती है वो इतना बड़ा था कि जिसमे दोनों अपने आपको पानी से बचा सकते थे,सिमा कवीर को एक दुप्पटे से अपने सीने से लगा कर बांध लेती है फिर सिमा और आलोक उस प्लास्टिक के टुकड़े को अपने सिर के ऊपर रखकर मकान मालिक के घर की तरफ चल देतें हैं कुछ खाश दूरी नही थी सिर्फ 500 मीटर की दूरी थी आलोक के कमरे से मकान मालिक के घर के बीच, रात के 11 बज चुके थे जब आलोक ने मकान मालिक के दरवाजे की घंटी बजाई, आलोक घंटी बजाके वापस सिमा के पास आ जाता है बारिश इतनी जोरों की हो रही थी कि उनके गुठने से नीचे के कपडे भीग रहें थे 10 मिंट जो चुके थे आलोक को घंटी बजये पर दरवाजा नही खुला तभी सिमा ने आलोक से कहा घंटी फिर से बजाओ आलोक भीगता हुआ दरवाजे तक पहुंचता है और दरवाजे को हाथों से थपथपाने लगता है।
तभी जोर से बदल गरजने की आवाज होती है और कवीर भी नींद से उठ जाता है सिमा उसे थपकी लगा के सुलाने लगती है आलोक सिमा की तरफ देखता है तभी सिमा, आलोक को पीछे देखने का इशारा करती है आलोक पीछे मुडा तो मकान मालिक सामने खड़ा था सिमा कवीर को लेकर आलोक के पास पहुंचती है और दोनों हाथ जोड़कर बिनती करने लगते है सिमा कहती है मालिक हमें कुछ और दिनों की मोहलत दे दीजिए आपकी बड़ी मेहरबानी होगी हमारी नही तो हमारे 3 साल के बच्चे की खातिर कुछ दिन का समय दे दीजिए।
तभी अचानक से कवीर रोने लगता है सिमा पीछे की तरफ घूमकर कवीर को दूध पिलाने लगती है और आलोक मकान मालिक से बार बार बिनती कर रहा था, तभी मकान मालिक ने आलोक के कंधे पर अपना हाथ रखकर बोला, कुछ नही कर सकता मैं तुम्हारे लिए तुम खामखां अपना और मेरा वक़्त खराब कर रहे हो अब तुम जाओ और मुझे सोने दो इतना कहकर मकान मालिक दरवाजा बंद कर लेता है आलोक वहीं सिमा के पास बैठ जाता है दोनों एक दूसरे से लिपट कर रोने लगतें है कुछ देर बाद आलोक सिमा का हाथ पकड़कर उसे उठता है दोनों के कपड़े पूरी तरह से भीग चुके थे और कवीर भी सो चुका था आलोक और सिमा दोनों हिम्मत नही हारतें हैं और बड़ी मुश्किलों से आपने आपको समझते हुए दोनों अपने कमरे की तरफ चले देते है वो लगभग दो सौ मीटर ही चले होंगे कि तभी उन्हें ।।..............

                                        भाग 2 समाप्त।।

                 (आगे की कहानी के लिए बने रहिये मेरे साथ)


                   दिनाँक 28 सितम्बर 2020  समय  9.05 शाम
                                                  रचना(लेखक)
                                       अमित सागर(गोरखपुरी)


रविवार, 27 सितंबर 2020

सितंबर 27, 2020

लॉकडाउन हिंदी कहानी भाग 1 | Hindi Story Lockdown | हिंदी लॉकडाउन के 72 घंटे कहानी | कहानी लॉकडाउन इन हिंदी |

                                     कहानी

                      लॉकडाउन Lockdown

                                      भाग 1

                                 लॉकडाउन( के 72 घण्टे)


तारीख - 20 अप्रैल 2020
स्थान    नोएड़ा (उत्तर प्रदेश) भारत
दिन   -   सोमवार
समय  -  शाम के 7.45
मौसम - बारिश और गर्मी का
पात्र    -   आलोक, सिमा और दोनों का 3 साल का बेटा           
              कवीर।

(ये एक काल्पनिक घटना है इसका किसी संस्था,स्थान, प्रान्त, नाम,जाति धर्म,वा वास्तविक जीवन से कोई वास्ता नहीं है और अगर ऐसा कुछ लगता है तो छमा करें।)
पुरे देश में एक महीने से ऊपर हो चूके थे लॉकडाउन को, हर इंशान के दिल में कोरोना का डर और चारो तरफ इसका ही खौप फैला हुआ था इंशान,इंशान से डर रहा था और इसी बीच राज्य सरकार ने 72 घंटे का संपूर्ण लॉकडाउन कर दिया था चारो तरफ कर्फ्यू जैसी हालत बनी हुई थी लॉकडाउन के कारण  नोएडा की सभी कंपनी एक महीने से बंद चल रही थी और आलोक ने जो पैसे इकठा किये थे वो भी धीरे धीरे ख़त्म हो रहे थे।
 शाम के 7 बज के 45 मिनट हुए थे और उस दिन बिना मानसून के जोरों की बारिश हो रही थी आलोक नोएडा के एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता था और वो एक किराये के मकान में अपनी पत्नी सिमा और बेटे कवीर के साथ रहता था सिमा शाम के खाने की तैयारी कर ही रही थी कि तभी किसी ने उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया आलोक को बड़ी हैरानी हुई की इतनी बारिश में उसके घर का दरवाजा कौन थपथपा रहा है अलोक ने अन्दर से ही आवाज लगायी कौन है? उधर से आवाज आई मै मकान मालिक इतना सुनते ही आलोक ने जल्दी से दरवाजा खोला आप इतनी रात को आलोक ने कहा,मकान मालिक ने कहा तुम्हे पता है सरकार ने कल से 72 घण्टे का संपूर्ण लॉकडाउन कर दिया है नहीं मुझे नहीं पता लेकिन कब हुआ आलोक ने पूछा? अभी खबर मिली है इतना कह कर मकान मालिक चला जाता है।
अलोक के चेहरे पर परेशानी साफ दिख रही थी तभी सिमा ने कहा क्या हुआ क्यों परेशान हो क्या कहा मकान मालिक ने, कुछ नहीं बस बोल रहा था कि कल से 72 घण्टे का संपूर्ण लॉक डाउन होने वाला है उसने सिमा से इतना कहा ही था कि दरवाजे पर फिर खटखटाने की आवाज सुनाई देती है सिमा अलोक की तरफ देखने लगती है अलोक जल्दी से दरवाजा खोलता है तो सामने फिर से मकान मालिक खड़ा था मकान मालिक ने अलोक से कहा तुम्हे मकान खली करना पड़ेगा, तभी सिमा ने मकान मालिक से कहा हमें कुछ और दिनों की मोहलत दे दीजिए आपकी बड़ी मेहरबानी होगी, नही बिल्कुल नही तुमने पिछले दो महीने से मकान का किराया नही दिया,काल सुबह तुम्हे मकान खाली करना ही पड़ेगा इतना कहकर मकान मालिक चला जाता है।
सिमा आलोक से लिपटकर रोने लगती है आलोक अपने तीन साल के बेटे कवीर की तरफ देखता है आलोक के मन मे बड़ी अजीब सी उलझन होने लगी थी उसे समझ नही आ रहा था कि क्या करें तभी सिमा ने कहा क्या होग अब आलोक ने कहा कुछ नही कर सकतें, अब तो जाना ही होगा आलोक को उस मकान में रहते 4 साल हो चुके थे और उसके बेटे कवीर का जन्म भी वहीं हुआ था,बहुत सी यादें थी जो आलोक को परेशान कर रही थी तभी आलोक ने सिमा से कहा मैं बाहर जाके कुछ गाड़ी का बंदोवस्त करता हूँ इतना कहकर आलोक कमरे से बाहर निकल जाता है।
बारिश बहुत तेज़ हो रही थी तभी सिमा ने पीछे से आवाज दी छाता तो लेकर जाओ,आलोक ने कहा छाता टूट गया है कहकर चला जाता है सिमा कमरे के अंदर जाके सामानों को समटने में व्यस्त हो जाती है उसे ये पता ही नही चलता कि आलोक को गये 2 घंटे हो चुके हैं अभी उसकी नज़र दीवाल पर टंगी घड़ी के ऊपर पड़ती है उसे घबराहट होने लगती है उसके पास फोन भी तो नही है जिससे की वो आलोक को फोन कर सकें सिमा दौड़कर  दरवाजे को खोलती है तो सामने आलोक बैठा हुआ था वो पूरी तरह से भीग चुका था सिमा उसके कंधे पर हाथ रख कर उससे बोली कब आये तुम आलोक ने कहा 30 मिनट हो गए, और गाड़ी का क्या हुआ सिमा ने पूछा ।।

                                    भाग 1 समाप्त।

         (आगे की कहानी के लिए बने रहिये मेरे साथ)

         दिनाँक 26 सितम्बर 2020  समय 7.00 शाम

                   रचना(लेेेखक)

                   अमित सागर(गोरखपुरी)

गुरुवार, 24 सितंबर 2020

सितंबर 24, 2020

सच कहता हूँ हिंदी कविता | Hindi poem Tell the truth | हिंदी सच कहता हूँ कविता | जनाब माहौल बहुत अच्छा है | सच कहता हूँ/अमित सागर | कोरोना पर कविता

                             हिंदी कविता

             सच कहता हूं Tell the truth

डर लगता है जनाब माहौल बहुत गंदा है।
ये लड़कियां कहती थी अब तो ज़माना कहता है।
पर कुछ भी कहिये अब आवाम बहुत अच्छा है।
एक दूसरे से इतनी दूरियां है सच कहता हूँ।
अब तो आसमान बहुत अच्छा है।।
सांसे बहुत तेज़ चलती हैं सभी थक भी अब जातें हैं।
घर की टोटी टपकती रहती है बंद करना भूल जातें हैं।
ऑक्सीजन पूरा मिलता नहीं मास्क हर वक़्त लगतें हैं।
डर इतना है कि हम अपने आपसे डर जातें हैं।।
कैशलेस तो कब के बना गए।
अब माइंडलेस भी हमें बनातें हैं।
तभी तो थाली,ताली,चमच,ये हमसे बजवतें हैं।
दिमाग हम सब अपना लगातें नही।
 अब तो दिमाग भी वही लगतें ।
गरीबों के घर मे खाने को अनाज नही।
हमसे दीया बत्ती जलवतें हैं।।
खौप ना दिखे चेहरे पर मास्क पहनते है।
डरे सहमें से लगते हैं सब,जब बाहर निकलते है।
पूछो ना क्या आलम है सब कैसे दिखते है।
मास्क का जमाना है तो सभी मास्क पहनतें है।।


 सच कहता हूँ।
अब तो आसमान बहोत अच्छा है।।........


         दिनाँक  24 सितम्बर 2020   समय  4.10 शाम

                                        रचना(लेखक)

                                अमित सागर(गोरखपुरी)


मंगलवार, 22 सितंबर 2020

सितंबर 22, 2020

हिन्दी कविता कैदी | Hindi poem kaidi | Hindi poem prisoner | कविता कैदी की ज़िंदगी | कैदी क्या है? |

                               हिन्दी कविता

                        कैदी The prisoner

                                                कैदी

कैदी की उम्र कभी लंबी ना हो।
वक़्त मुलाक़ात की कभी छोटी ना हो।
शालाखों के पीछे जो ज़िन्दगी गुज़रती है।
कमबख्त बड़ी अजीब सी गुज़रती है।।
कभी मुल्क तो कहीं मजहब का नाम पूछतें हैं।
मैं कैदी हूँ सब मुझसे सिर्फ सवाल पूछतें है।
हर बार एक ही सवाल बार बार पूछतें हैं।
तू हिन्दू है या मुसलमान यही सवाल पूछतें हैं।।
मासूम था जब शरहदें पार कर ली थी।
गलती थी मेरी या गुस्ताखी कर ली थी।
पच्चीस बरस हो चुके हैं कैद सलाखों के पीछे।
अब तो आंखों की पुतलियाँ भी रोशनी से सवाल पूछती हैं।।
फांसी की गुजारिश मेरी मंजूर करलो।
नही तो फिर मुझे मेरे शरहद पार कर दो।
घुटन होती है मुझे इस अंधेरी कोठरी में।
मुझे इस गन्दी जिन्दगी से निजात दे दो।।
देखता हूँ उन हाथों को जिसे माँ चूमा करती थी।
खींच लिए हैं कमबख्तों ने उस हाथ के नाखूनों को।
बदन की तो हालत न पूछिये बता ना पाऊंगा।
इतने काले है कि कभी मैं दिखा ना पाऊंगा।।
वज़ीरे आजम से खत,पत्र,आवाज,गुहार ,पुकार।
सब लगाई है किसी के अब्बा ने तो किसी की मां ने।
मौसम से भी तेज़ सरकारें बदली है हमारे वतन में।
सब कुछ बदला है पर एक चीज नही बदली वो है।
हमारी रातें,तकलीफें,दर्द,आँशु,घुटन,हम पर ज़ुल्म,
आरोप,ज़िल्लत,ये कभी नही बदले सब कुछ बदला ।
मगर ये नही बदलें।।

कैदी की उम्र कभी लम्बी ना हो।
वक़्त मुलाक़ात की कभी छोटी ना हो।।.......

     दिनाँक 22 सितम्बर 2020  समय  4.17 शाम

                                      रचना(लेखक)

                              अमित सागर(गोरखपुरी)






सोमवार, 21 सितंबर 2020

सितंबर 21, 2020

Hindi Love poem |दरवाजें की तरह | हिंदी कविता दरवाजें | कविता बंद दरवाजा | कविता दिल का दरवाजा | Like door poem in hindi |

                               खुल जाऊं क्या

खुल जाऊं क्या बंद दरवाजों की तरह।
तू तेज़ हवाओं सा मुझसे गुज़र जा।
उड़ जाएंगें सारे धूल जो चौखट पर है।
तू पुरानी यादों का तूफान तो कभी ला।
खुल जाऊं क्या बन्द दरवाजों की तरह।।
ठहर गर फ़र्शत हो तेरे पास चन्द लम्हो की।
बना के झाड़न प्यार का आ झाड़ दें सारे धूल।
कितने वक़्त गुज़र गयें है खोले दिल के दरवाजें को।
तू कहे तो फिर से खोल दून,दस्तक दे तो कुछ बोल दून।।
तू कहे तो खुल जाऊं बंद दरवाजों की तरह।
तू कहे तो ठहर जाऊं मैं घटाओं की तरह।
तू समंदर है मेरा मैं खुला आसमान हूँ तेरा।
तू मौज है लहरों की मैं हूँ किनारा तेरा।।
मैं दूध में जैसे मिश्री,तू शहद बनके घुल जा।
मैं पान में डली जैसे तू खुशबू किमाम की बन जा।
तू कहे तो खुल जाऊं बंद दरवजें की तरह।
मैं आवारा डोर तेरा तू मदहोश पतंग बन जा।।

खुल जाऊं क्या बंद दरवजों की तरह।
तू तेज़ हवाओं सा मुझसे गुज़र जा।।........


                दिनाँक 19 सितम्बर 2020   समय  11.30 रात्रि 

                                            रचना(लेखक)

                                    अमित सागर(गोरखपुरी)


शुक्रवार, 18 सितंबर 2020

सितंबर 18, 2020

Story of cyber crime part 2 | हिन्दी कहानी साइबर क्राइम | cyber crime in hindi | |साइबर अपराध हिंदी कहानी | Hindi short story |

                              हिन्दी स्टोरी

                             साइबर क्राइम

                    Story of cyber crime

हैकिंग (एक साइबर क्राइम)

(अभी तक आपने इस कहानी में पढ़ा कि रीना के कहने पर अजीत customer care को फोन लगता है।....अब आगे)

कुछ नम्बर मिले भी तो उस पर कॉल स कुछ  म्भव नही थी और कुछ नम्बर गलत है ये बता रहे थे करीब एक घंटे की मस्कत के बाद एक नम्बर पर घंटी बजी भी पर किसी ने उठाया नही अजीत परेशान हो जाता है और फोन को रखकर अपने काम मे मसरूफ हो जाता है।
अगले दिन सुबह 10 बज के 45 मिनट पर अजीत के सेल फोन की घंटी बजी अजीत ने फोन उठाया तो नम्बर अनदेखा सा लग रहा था फिर भी अजीत ने कॉल उठाया उधर से किसी लड़की की आवाज़ थी अजीत ने बोला कौन, सर मैं Mitroniya.com से काव्या बोल रही हूँ आपका नम्बर हेल्प लाइन उपभोक्ता के पास से हमें प्राप्त हुआ है मैं आपकी क्या मदत कर सकती हूँ  जी मेरी एक शिकायत थी जी बताइए  कल मेरी एक कुर्ती की डिलेवरी होनी थी जो अभी तक हुई नही है और order received का मैसेज भी दिखा रहा हैं ठीक है सर मैं चेक करती हूं क्या मैं आपका नाम जान सकती हूं अजीत नाम है मेरा जी शुक्रिया Date of birth क्या है आपकी जी 18 सितम्बर 1983,कुर्ती का रेट 675 रूपये, पेमेंट कैसे किया आपने ऑनलाइन, जी हाँ अजीत ने कहा, जानकारी के लिए शुक्रिया सर आप लाइन पर बने रहिये मैं आपकी जानकारी चेक करती हूँ अजीत ने कहा जी ज़रूर,कुछ सेकेंड बाद ही सर आपका आर्डर किसी कारण वर्ष कैंसिल कर दिया गया है, अजीत ऐसे कैसे हो सकता है आज की डिलेवर थी और मेरे पैसे का क्या होगा,तभी काव्या ने कहा सर आप परेशान मत हों आपका पैसा 24 घंटे के अंदर रिफंड कर दिया जाएगा लेकिन उसके लिए आपको Google Paye store में जाके एक एप्लिकेशन डॉनलोड करना होगा अजीत ने कहा जी कौन सा एप्लिकेशन Case Refund App इतना कहते ही अजीत ने  Plye store खोला और एप्लिकेशन को डॉनलोड करने लगा।
अजीत को कोई भी इल्म नही था कि क्या हो रहा है उसके साथ उसे सिर्फ अपने 675 रूपये दिख रहे थे अभी अजीत ने कहा डॉनलोड कर दिया मैडम काव्या ने कहा अब उसे ओपन कीजिये और सारी जानकारियां भरते जाइये,अजीत  अपनी जानकारियाँ उसमे भरता चला गया,भरने के बाद अजीत ने काव्या से कहा,भर गया मैडम तभी काव्या ने धन्यवाद सर आपके मेसेज बॉक्स में एक OTP आयी है  उसे बताइए please, Yes ma,am 3683 अजीत ने बताया thank you so much sir जानकारी देने के लिए आपका पैसा 24 घंटे के अंदर रिफंड कर दिया जाएगा आपका दिन शुभ हो काव्या ने कहा,अजीत के welcome ma,am कहते ही कॉल कट गई ,अजीत अपने फोन को चार्ज में लगा के अपने कामों में व्यस्त हो गया।।
शाम को तकरीबन 7 बजे थे जब अजीत के घर की घंटी बजी अजीत ने दरवाजा खोलते ही बोला जी कहिए, सर आप अजीत है जी हाँ मैं ही अजीत हूँ क्या बात है, सर आपके नाम की एक डिलेवरी आयी है ये कल की डिलेवरी थी बारिश की वजह से कल नही दे सका उसके लिए मुझे माफ़ करें जी कोई बात नही मुझे दे दीजिए  अजीत ने पैकेज को लिया और रीना को आवाज़ देने लगा, रीना छत से ही बोली जी भाई,  तुम वहां ऊपर क्या कर रही हो नीचे आ तेरी कुर्ती आ गयी है रीना छत से भगती हुई अजीत के पास पहुंचते ही बोली लाओ भाई मुझे देखने दो तभी किचन से सारिका ने आवाज लगाई सुनते हो आपके मोबाइल पर बहुत देर से मैसेज आने की आवाज सुनाई दे रही है अजीत ने सारिका से बोला अच्छा ठीक है मैं देखता हूँ  जैसे ही अजीत ने अपना सेल फोन उठाया ।
तभी "सारिका" अजीत ने जोर से चीखकर बोला  किचन से भागती हुई एक पतली दुबली सुंदर सी लड़की हाथों में बेलन लिए हुए पहुंचती है और पूछती क्या हुआ अजीत के हाथ मे मोबाइल थी और उसके हाथ कांप रहे थे क्या हुआ बोलो कुछ सारिका ने बोला,अजीत ने कहा मेरे account से चार लाख रूपये निकल गये है सारिका के माथे पर अचानक पसीने उभर आये थे कैसे हुआ ये सब सारिका ने अजीत से पूछा अजीत ने कहा दो मिनट रुको अजीत ने सबसे पहले अपना account block कराया और फिर वो  सारिका से सारी बातें बताने लगता  है कि सुबह मुझे Mitroniya.com से एक काव्या नाम की लड़की का फोन आया उसने मुझे से एक एप्लिकेशन डॉनलोड करने को कहा और मैंने उसे डॉनलोड करके उसमें मांगी गई सारी जानकरी को मैं लिखता चला गया तभी मेरे पास एक OTP आई उसके आते ही काव्या ने मुझसे OTP मांगी और मैंने उसे तुरन्त बाता दिया उसने कहा कुर्ती का पैसा 24 घंटे के अंदर रिफंड कर दिया जाएगा और फिर फोन कट गया।।

                                  कहानी समाप्त।।

(अजीत के लाख प्रयासों के बाद भी उन हैकर्स का पता नही चल सका और ना ही कभी पैसे वापस मिले किसी तरह रीना की शादी तो अजीत ने कर दी लेकिन उस पर कर्ज कुछ जादा ही हो गया)


  इस कहानी में आपने पढ़ा कि किस तरह से दुनियां में हो रहे साइबर क्राइम से हर रोज कोई ना कोई इसका शिकार बन रहा है आपसे में गुज़ारिश की किसी को बिना जाने बगैर अपनी कोई भी जानकारी किसी से शेयर ना करें।
                                           धन्यवाद।।

          दिनाँक  16 सितम्बर 2020     समय 9.30 रात्रि
      

                                             रचना(लेखक)
                                     अमित सागर(गोरखपुरी)

सितंबर 18, 2020

हिन्दी कहानी साइबर क्राइम भाग 1 | cyber crime in hindi | Story of cyber crime |साइबर अपराध हिंदी कहानी | Hindi short story |

                                    हिन्दी स्टोरी  

               साइबर क्राइम cyber crime

                    साइबर क्राइम कैसे होता है?

                            हैकिंग (एक साइबर क्राइम)

सारिका शायद इसी नाम से अजीत ने जोर से चीख कर बोला था किचन से भागती हुई एक पतली दुबली सुंदर सी लड़की हाथ मे बेलन लिए हुए शायद वो सारिका थी उसने घबरा के बोला क्या हुआ ?....

(ये कहानी दुनियां में हो रहे साइबर क्राइम को देखते हुए मैंने इसे लिखा है इस कहानी का मकसद किसी संस्था,नाम, व्यक्ति विषेश को ठेस पहुचना नही है अगर ऐसा लगता है तो ये महज़ इतेफाक है मुझे छमा करें।)

बात उन दिनों की है जब अजीत अपने बहन की शादी की तैयारियां कर रहा था बस कुछ ही दिन बचे थे शादी को घर में चारो तरफ खुशी का माहौल बना हुआ था और क्यूँ ना हो  रीना अजीत की इकलौती बहन जो थी मेहमानों का जमावड़ा लगा हुआ था फिर भी लॉकडाउन की वजह से भिड़ कुछ कम ही थी सारी तैयारियां हो चुकी थी बस कुछ चीजें थी जिसे ऑनलाइन ही बुक करना था।
तभी पीछे से किसी ने अजीत का कंधा थप थपाया अजीत पीछे मुडा तो रीना थी हाँ क्या हुआ अजीत ने पूछा,भाई मेरी एक ऑनलाइन कुर्ती बुक कर दो please रीना ने कहा,देख रीना इस वक़्त मेरे पास टाइम नही है लेकिन शाम को ज़रूर कर दूंगा अभी के लिए मुझे माफ़ कर दे,इतना कहकर अजीत अपने कामों में मशरूफ हो जाता है लेकिन रीना को शाम का बेसब्री से इन्तेज़ार था उसकी कुर्ती जो ऑर्डर होने वाली थी।
काम मे मसरूफियत इतनी जादा थी कि कब शाम हो गयी अजीत को पता ही नही चला, वो अपने कमरें में सोने की तैयारी कर ही रहा था कि तभी रीना ने कहा भाई इतनी भी बाहाने बाजी ठीक नही, चलो जल्दी से मेरी कुर्ती आर्डर करो,रुक जरा मैं अपना बिस्तर ठीक कर लूं फिर तेरी कुर्ती आर्डर करता हूँ , तभी रीना बोली बिस्तर मैं ठीक करती हूं आप कुर्ती पर ध्यान लगाओ अजीत ने अपना सेल फोन उठाया और रीना की कुर्ती आर्डर करने लगा कुर्ती कुछ खास महंगी नही थी सिर्फ 675 रूपये की थी उसने रीना को कुर्ती दिखाई ये वाली चाहिए तुम्हे, हाँ भाई यही चाहिए और अजीत ने आर्डर को कंफर्म (Confirm) कर दिया। डिलेवरी की तारीख शादी से दो दिन पहले की थी तभी अजीत ने अरे मेरा बिस्तर तो ठीक करके जा,आप खुद ठीक कर लो भाई मुझे नींद आ रही है अजीत मन ही मन मुस्कुराया और Ok Good Night कह कर खुद भी सो गया,शादी का माहौल था मश्रुफ़ियात कुछ जदा ही थी वक़्त का पता ही नही चल रहा था। 
रीना की शादी को सिर्फ दो दिन बचे है और अजीत आंगन
में बैठकर फैले हुए सामानों को समेट रहा था कि तभी  अजीत के मोबाइल में शायद कोई मैसेज आया, उसने मोबाइल को पैंट की जेब से निकला और ऊंची आवाज में रीना को आवाज दी,हाँ क्यों चीला रहे हो भाई यहीं तो हूँ रीना ने कहा,दो दिन और चीलला लेने दे फिर तो तुम पराई हो जाएगी फिर कहाँ मौका मिलेगा मुझे अजीत के इतना कहते ही रीना अजीत से लिपट कर रोने लगती है अजीत अपने आपको संभालते हुए रीना से कहता है अरे तुझे रोने के लिए थोड़े बुलाया है देख तेरी कुर्ती का मैसेज आया है आज उसकी डिलेवरी है और तू रो रही है हद है चल जा मेरे लिए एक कप अच्छी वाली चाये बना,जी भाई कहकर आँखों में आँशु लिए रीना किचन की तरफ चल देती है।
शाम का वक़्त था तकरीबन 6.00 बजे रहे थे जब अजीत के मोबाइल पर एक मैसेज आया उसमे लिखा था "अपना ऑडर received करने के लिए धन्यबाद" अजीत को बड़ी हैरत हुई उसने रीना को आवाज दी,हाँ भाई क्या हुआ तुम्हारी कुर्ती तुम्हे मिली तो बताया क्यों नही अजीत ने पूछा, रीना ने कहा क्या भाई  क्यूँ मजाक कर रहे हो मुझे मिली होती तो आपको बताती नही लेकिन कुर्ती तो किसी ने ले ली है अजीत ने कहा, रुको मैं पूछती हूँ सभी से,थोड़ी देर बाद रीना ने कहा भाई किसी ने नही ली आप उपभोक्ता के नम्बर (Customer care number)पर फोन करके पूछो रीना ने कहा ,अजीत ने अपना मोबाइल निकाला और गूगल पर Customer care का नम्बर ढूंढने लगा ।।......

         भाग 1 समाप्त।। भाग 2 के लिए  नीचे click करें 
         (आगे की कहानी के लिए बने रहिये मेरे साथ)

                                           धन्यवाद।।

         दिनाँक  16 सितम्बर 2020     समय 9.30 रात्रि

                                        रचना(लेखक)

                                अमित सागर(गोरखपुरी)



मंगलवार, 15 सितंबर 2020

सितंबर 15, 2020

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                               हिन्दी कविता 

                                यादों का गाँव

                                          यादों का गाँव

मेरे यादों का गाँव अब कैसा होगा।
पहले जैसा था क्या वैसा ही होगा।
क्या अभी भी चिड़ियाँ चहकती होंगी।
क्या मुर्गा बांग लगता होगा।।
चबूतरे पर बुजुर्गों की महफील।
 क्या शाम सबेरे लगती होंगी।
हुक्का पीती वो सुरेश दादी ।
क्या अब भी कहानियां सुनाती होंगी।।

क्या अब भी सब कुछ वैसा होगा।
स्कूल के बाहर चूरन की वो पुड़िया।
क्या नमक वाली इमली मिलती होगी।
इंटरवल में वो आलू का भरता ।
चूल्हे की रोटी क्या बनती होगी।।
पंचायत में वो सरपंच के तेवर।
क्या सही फैसले मिलते होंगे।
तालाबों में वो तैरने की शर्तें।
क्या लुका छुपी भी होते होगें।।

वो पेड़,वो घनी छाओं,वो बगीचे।
 नुक्कड़ पर वो दुकान, बुधवार का वो बाजार।
 बहुत याद आतें है क्या अब भी वो लगते होंगे।
जैसे पहले थे क्या वैसे ही होगें।।
सुना है बिजली,पानी,रोड भी अब तो गाँव में आयी है।
क्या वैसा ही है गांव हमारा या सब बदल कर आई है।
सोंधी सी वो मिट्टी की खुशबू,कटहल की मिठास चुराई है।
वैसा ही गाँव हमारा या सब बदल कर आई है।।

मेरे यादों का गाँव अब कैसा होगा।
पहले जैसा था क्या वैसा ही होगा।।...


            दिनाँक  14 अगस्त 2020  समय 6.04 शाम

                                       रचना(लेखक)

                               अमित सागर(गोरखपुरी)


रविवार, 13 सितंबर 2020

सितंबर 13, 2020

माँ पर हिंदी कविता | best poem on mother in hindi | heart teaching poem on maa | माँ पर कुछ लाइन | कुछ पंक्तिया माँ पर | सबसे अच्छी कविता माँ पर |

                                      कविता


(इस कविता में मैने एक माँ के लिए उसकी बेटी की सोच लिखी हैं)                                                                                      

                                     माँ ही थी

         


          

ठंड से मैं कांप रही थी ।
आहट सी महसूस हुई।
आँख खुली तो कोई नही था ।
आहट नही वो माँ ही थी
ओढा के चादर वो चली गयी।
 और ठंड से मुझे बचा गई।
आँख खुली तो कोई नही था।
 आहट नही वो माँ ही थी।।
बुखार से मैं तप रही थी।
जाने कब माथा सहला गई।
दवाइयों से नफरत है मुझे।
 कब दूध में घोल वो पिला गई।
आँख खुली तो कोई नही था।
 आहट नही वो माँ ही थी।।
मेरी हर चीज की फिक्र करती है वो।
और अपनी ही फिक्र वो भुला बैठी।
हमारे सपनों के चक्कर मे वो।
अपनी दुनियां भुला बैठी।
ये सोच मैं नींद से जग गयी।
घबराकर मैं बैठ गयी।
आँख खुली तो कोई नही था।
आहट नही वो माँ ही थी।।
उसके भी हैं कुछ अपने सपने।
कुछ उसके अरमान भी है
चूल्हा चौक बच्चे शौहर।
इनसे कहाँ उसे निज़ात है।
पसीने से मैं तरबतर थी।
माँ की घोल का कमाल था।
आँख खुली तो कोई नही था।
आहट नही वो माँ ही थी।।

       दिनाँक  12 सितम्बर 2020  समय   11.00 रात्रि

                                   रचना(लेखक)

                           अमित सागर(गोरखपुरी)


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