कविता
जून 20, 2020
हिन्दी कविता बंजारा मन Nomad | मन पर कविता | कविता बंजारा मन मेरा
बंजारा मन
बजारा है मन मेरा
उड़ने को है ये बेकारक।
पंख होते तो उड़ जाता मै।
हवाओं से लड़के उस पार।।
उमंग होती ढेरों ज़िन्दगी में।
कोई ख्याल ना होता मन में।
सिर्फ मै होता,मेरे सपने होते।
और उन सपनों में,मै खो जाता।।
गुदगुदाती सी खुशियां होती।
बिन हँसी की होती मुुस्कान।
बिन रंगों के भी रंगी होती दुनियां।
बिन सपनो के होते ख्वाब।।
खाना बदोस होती ज़िन्दगी मेरी।
फ़िक्र किसी की न होती।
मस्तमलंग होके घूमते रहते।
तकलीफ किसी को ना होती।।
बंजारा मन है मेरा ,उड़ने को है से बेकरार।।



















































