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मंगलवार, 18 अगस्त 2020

अगस्त 18, 2020

हिन्दी कहानी सियाचिन ग्लेशियर, एक फौजी जुबानी भाग 10,Siachen glacier

                सियाचिन ग्लेशियर, एक फौजी की जुबानी

                                Siachen glacier

इस ट्रेनिंग में ऐसी बहुत सी मुश्किलें और बहुत सी ऐसी सिखलाई थी जिसने हमें सियाचिन ग्लेशियर में जिंदा रहना सीखा दिया क्योंकि सियाचिन ग्लेशियर इंशान के लिए किसी नरक से काम नही थी और इस नरक में ज़िन्दा रहने के लिए हमें जो ट्रेनिंग दी जा रही थी वो हमारे लिए बहुत ज़रूरी थी।
हमरा दूसरा समाप्त खत्म हो चुका था और आने वाले सप्ताह में बहुत सी चुनौतियां हमारा इंतेज़ार कर रही थी ये हमारा अखरी सप्ताह था और हमे अभी बहुत सी ऐसी परीक्षाओं से गुजरना था, और जो परीक्षा में पास होगा वही आगे की यात्रा तय कर पायेगा और जो फेल हुआ उसे कुछ दिन और ट्रेनिंग करनी पड़ेगी।
तीसरे सप्ताह का पहला दिन ,हमारे दोनों हाथों Ice Axe जूतों में CRAMPON और कंधे पर 16 किलो का रुकसुक बैग लिए हम 30 फिट ऊंचे 90° डिग्री के खड़े बर्फ की दीवार के सामने Chest harness में लगे Caraviner से अपने आपको हुक किये हुए खड़े थे हमें अपने Ice Axe और CRAMPON की मद्दत से उस 30 फिट की खाड़ी दीवार पर चढ़ना था तभी हमारे उस्ताद ने हमसे कहा 4 point  शुरू कर और हम चढ़ने लगे।
 हम दोनों हाथ और पैरों की मद्दत से चढ़ ही रहे थे कि 20 फिट की ऊंचाई पर हमारे दो साथियों के हाथ बर्फ की दीवार से फिसल गई और वो ऊपर से बिल्कुल नीचे ज़मीन पर गिरने ही वाले थे कि हमारे चेस्ट में लगे Chest harness और Caraviner ने उन्हें बचा लिया वो दुबारा से उस बर्फ की दीवार पर चढ़ने लगा ।
समय बीतता रहा और मुश्किलें बढ़ती रही "दिल मे अगर जोश और कुछ करने का जज्बा हो तो रास्ते आसान हो जाते है।।

                                        भाग 10 समाप्त।।
                    (आगे की कहानी के लिए बने रहिये मेरे साथ)

                     दिनाँक 17 अगस्त 2020   समय  8.00 शाम

                                              रचना(लेखक)
                                      अमित सागर(गोरखपुरी)

शनिवार, 15 अगस्त 2020

अगस्त 15, 2020

देश भक्ति कविताएँ,देश भक्ति कविता इन हिन्दी, आओ उन्हें फिर हम याद करें

              देश भक्ति कविताएँ,देश भक्ति कविता इन हिन्दी,

         स्वतंत्रता दिवस की कविता, हिन्दी कविता बच्चों के लिए.

      

                                     हिन्दी देश भक्ति कविता

                                "आओ उन्हें फिर हम याद करें"


आओ उन्हें फिर हम याद करे।
बस उनकी की ही बात करे।
कुर्बान हुए जो वतन की खातिर।
आओ उन्हें हम फिर सलाम करें।।

भूल चुके है बलिदान हम उनका।
क्यूँ ना उन्हें हम फिर याद करे।
बिस्मिल, चंद्रशेखर, भगत सिंह को।
सत सत नमन सौ बार करें।।

बीर अब्दुल हमीद की कुर्बानी।
डॉ भीम राव को भी याद करे।
झाँसी की रानी कहते जिसे हम।
लक्ष्मीबाई को भी याद करें।।
कारगिल युद्ध में शहीदों हुए जो।
उन बीरों की कुर्बानी याद करें।
तिरंगे में जो लिपट के घर गए।
उन्हें नमन सौ बार करें।।

फैहरा दे तिरंगा फिर गगन में।
आओ फिर कुछ ऐसा काम करें।
नम आंखों में खुशियां लिया ।
आओ उन्हें फिर याद करें।।

झुकने ना देंगे तिरंगा फिर कभी ।
आओ मिलके हम संकल्प करें।
नमन करें हर बार उन्हें हम सब।
आओ उन्हें फर हम याद करें।।

                                            समाप्त।।

                दिनाँक 14 अगस्त 2020    समय  10..21 रात्रि

                                           रचना(लेखक)
                                 अमित सागर(गोरखपुरी)

शुक्रवार, 14 अगस्त 2020

अगस्त 14, 2020

हिन्दी कहानी सियाचिन ग्लेशियर, एक फौजी की जुबानी भाग 9 Hindi story siachen glacier

               (सियाचिन ग्लेशियर, सियाचिन क्या है, ग्लेशियर कहा है

               सियाचिन में कैसे रहते है, ग्लेशियर कितना पिघलता है।)


                                        हिन्दी कहानी 

                 सियाचिन ग्लेशियर,एक फौजी की जुबानी

                                             भाग 9

पहुंचते ही हमने अपना स्टोप जलाया हमने गुनगुना पानी गर्म किया और उसमें अपने हाथ और पैरों डाल कर कुछ देर बैठे रहे, 2.30 मिनट हो चुके थे और हमे 3.15 मिनट पर शाम की ट्रेनिंग के लिए जाना था हमने दोपहर का खाना खाया और ट्रेनिंग के लिए चल पड़े।
3 सप्ताह की ट्रेनिंग में पहला सप्ताह तो ऐसे ही चलता रहा लेकिन आने वाले दो सप्ताह में जो ट्रेनिंग हुई थी हमारी उसने हम सभी के 5 kg वजन घटा दिये थे।
दूसरा सप्ताह पहला दिन हम 5 किलोमीटर की रनिंग करने के बाद हमारी अगली क्लास two points की ट्रेनिंग करनी थी (इस ट्रेनिंग में हमे 45°के Ice wall पर अपने पैर के पंजों की मद्दत से चढ़ना था।)
हमने अपने पैरों में CRAMPON( बर्फ पे चलने वाला यंत्र)
जूते के ऊपर पहना सिर पर हेलमेट हाथों में Ice Axe और कंधे पर 16 kg आ रुकसुक बैग उठाया और हम ice wall के सामने खड़े हो गए तभी हमारे उस्ताद ने कहा Two point के लिए position तैयार,हमने position बनाई और 45°के बर्फ की दीवार पर चढ़ने का अभ्यास करने लगे हम जूते में लगे नुकीले यंत्र से चढ़ने के लिए हम अपने पंजे को ice wall(बर्फ की दीवार)पर जोर से मार रहे थे।
 लगभग 5 घण्टे तक हम इसी का अभ्यास करते रहे,पैरों में पसीने की चिपचिपाहट सी महसूस हो रही थी हम बिलकुल थक चुके थे पैर और हाथ सुन्न हो रहे थे और हमे अपनी गाड़ी तक भी पहुंचना था।
किसी तरह हम अपने बैरेक तक पहुचे और हमने अपना जूता निकल, हमारे मोजे खून से लाल हो चुके थे और अंगूठा में सूजन थी हमने गुनगुने पानी मे अपने पैरों को डूब दिया,2.15 मिनट हो चुके थे और हमे शाम की क्लास के लिए भी जाना था (ऐसी बहुत सी मुश्किलें थी इस ट्रेनिंग में पर हम हरे नही) और हम सभी टेस्ट पास होते गए।
इसी तरह हमारे दिन निकल रहे थे और चुनौतियां बढ़ रही  थी ।।    

                                        भाग 9 समाप्त।।
                    (आगे की कहानी के लिए बने रहिये मेरे साथ)

                 दिनाँक 12 अगस्त 2020     समय  11 रात्रि
                                                                                                        रचना(लेखक)

                                  अमित सागर(गोरखपुरी)


बुधवार, 12 अगस्त 2020

अगस्त 12, 2020

हिन्दी कहानी सियाचिन ग्लेशियर, एक फौजी की जुबानी भाग 8 Hindi story siachen glacier

                                       हिन्दी कहानी

                 सियाचिन ग्लेशियर,एक फौजी की जुबानी

                                  Siachen glacier

                                             भाग 8

सुबह 5.30 बजे थे हम सभी ने अपने कंधे पर 14 kg का रुकसुक बैग उठा रखा था हाथ मे Ice Axe और सिर पर हेलमेट लगा रखा था तापमान -30℃ था अब हमें 5 किलोमीटर तक दौडना था उस वक़्त हमने तक़रीबन 25 किलो वजन उठा रखा था हमने दौड़ना शुरू किया सिर्फ 300 मीटर ही दौड़े थे कि हमारी धड़कने तेज़ होने लगी थी हमने चलना शुरू कर दिया सभी टुकड़ियों की यही हालत थी पूरे 5 किलोमीटर तक हमारी हालत ऐसे ही बनी हुई थी।
ये तो बस शुरुआत थी पिक्चर अभी बाकी थी PT के बाद हमने अपना जूता निकाला ,और अपने मोजे(socks) बदले जो कि भीग चुके थे हम ब्रेफास्ट कर ही रहे थे कि तभी अगली परेड के लिए सीटी बाजी हमने भाग के अपना 14 किलो का बैग अपने कंधे पर उठाया और अगली परेड के लिए चल पड़े, ठंड बहुत थी हवा का तो मत पूछिए 110 किलो/घण्टे की रफ्तार से चल रही थी और इन सबके बीच हमारी ट्रेनिंग भी चल रही थी हमारे कंधे अब दर्द करने लगे थे पिछले 5 घंटो से न तो हम बैठे थे और नही ही हमारे बैग कंधो से नीचे उतरे थे।
1लीटर पानी हमारे बैग में था ओ भी ख़त्म हो चुका था ट्रेनिग खत्म होने में अभी भी 30 मिनट बाकी थी पैरों की उंगलियां ठंडी हो चुकी थी हम बिल्कुल थक चुके थे 30 मिनट बाद हमारी ट्रेनिंग खत्म हुई शरीर मे जान नही थी कि हम 1 किलोमीटर पैदल चल के पार्किंग ग्राउंड तक पहुंचे, पर जाना तो पड़ेगा, अगर नही गये तो गाड़ी हमे छोड़ के चली जायेगी और फिर हमें 5 किलोमीटर पैदल जाना पड़ेगा
हमे भूख भी बहुत तेज लगी थी अगर नही पहुचे तो दोपहर के खाना भी नही मिलेगा,इस लिए हम जल्दी जल्दी चलने लगे और जाके गाड़ी में बैठ गए उस वक़्त 1.45 मिनट हुए थे जब हम अपने बैरेक में पहुंचे।। 

                                                भाग 8 समाप्त।।
                             (आगे की कहानी के लिए बने रहिये मेरे साथ)

                                "कहानी अच्छी लगी तो इसे शेयर कीजिये"

                            दिनाँक 10 अगस्त 2020   समय। 11.30 सुबह

                                                  रचना(लेखक)

                                          अमित सागर(गोरखपुरी)


सोमवार, 10 अगस्त 2020

अगस्त 10, 2020

हिन्दी कहानी सियाचिन ग्लेशियर, एक फौजी की जुबानी भाग 7 Hindi story siachen glacier

                                         हिन्दी कहानी

                 सियाचिन ग्लेशियर एक फौजी की जुबानी                            

अगले दिन सुबह 4.30 मिनट हुए थे ट्रेनिग का पहला दिन था हम फ्रेश हुए चाये पी पैरों में 4.50 Kg का जूता पहना और कंधे पर अपना ट्रेनिग बैग(रुकसुक) उठाया जिसका वजन 14 Kg था हाथों में Ice Axe और सिर पर हेलमेट लगाकर हम ट्रेनिंग ऐरिया की तरफ चल दिए रास्ते में बर्फ थी जिससे हमें चलने में तकलीफ हो रही थी और हम दो मिनट लेट हो चुके थे हम पहुंचे तो सभी लाइनअप हो चुके थे हम सभी दौड़ के अपने टुकड़ी में मिलना चाहा पर उस्ताद ने हमें रोक लिया और हमें गुठने पर बिठा दिया उस वक़्त जोर की बर्फ बरी हो रही थी जिसके कारण हमारे बैग के ऊपर लगभग 1 फिट तक बर्फ गिर चुकी थी हम तबतक गुठने पर बैठे रहे जब तक 120 लोगों की गिनती ख़त्म नहीं हुई तबतक 20 मिनट बीत चुके थे तभी उस्ताद ने कहा मिलजाओ अपनी टुकड़ी में, हम उठे और भाग के अपनी टुकड़ी में मिल गए।
ट्रेनिंग के पहले दिन हमारा इंट्रोडक्शन होना था हम क्लास रूम में जाके बैठ गए( यही वो वक़्त था जब हम पुरे ट्रेनिंग ने पहली बार बैठे थे।) डॉक्टर की क्लास थी डॉक्टर ने जब हमें वहां पे होने वाली बीमारियों के बारे में बताया तो हमारे पसीने छूट गए (1- चिल्बिलिंग, 2- हेको, 3-हेप्पो,4-AMS)
उन्होंने ने कहा अगर ज़िन्दा रहना है तो  खुद की देख भाल खुद से ज़्यादा करनी पड़ेगी और नहीं की तो शरीर का कोई भी अंग तुम्हे खोना पड़ सकता है या फिर तुम्हारी जान भी जा सकती है किसी भी हालत में ट्रेनिंग के दौरान तुम्हे मुँह से मास्क,आँखों से चश्मा और हाथों से हैण्डग्लब्स नहीं उतारना है फिर उन्होंने कहा कोई शक हमने कहा No Sir और फिर अगले दिन।।...
               
                                       भाग 7 समाप्त।।
                 (आगे की कहानी के लिए बने रहिये मेरे साथ)
             अगर कहानी अच्छी लगी तो आगे भी शेयर कीजिये

                  दिनाँक 6 अगस्त 2020       समय  9.30 सुबह

                                                  रचना(लेखक)

                                          अमित सागर(गोरखपरी)

   

शनिवार, 8 अगस्त 2020

अगस्त 08, 2020

हिन्दी कहानी सियाचिन ग्लेशियर, एक फौजी की जुबानी भाग 6 Hindi Story Siachen Glacier

                                      हिन्दी कहानी

                सियाचिन ग्लेशियर, एक फौजी की जुबानी

                                 Siachen Glacier

                                            भाग 6

हमारे उस्ताद हमारा ही इन्तेज़ार कर रहे थे और उन्होंने कहा   शाम के इस Tea party में  सियाचिन ट्रेनिंग ऐरिया में आपका सभी स्वागत है उस्ताद ने कहा तुम सभी अपना गिलास उधर किनारे रख दो और हम सभी ने अपना गिलास बताई हुई जगह पे रख दी उसके बाद जो Tea party हुई है वो हमें पूरी ज़िन्दगी याद रहेगी। तक़रीबन 20 मिनट तक वो  दो दो सौ मीटर का चक्कर हमसे लगवाते रहे उस वक़्त तापमान -35 ℃ तक था है ऑक्सीजन रेट 9.45 था हमारे पैरों में 4.50 Kg का इस्कार्पा शूज़ हमने पहन रखा था हमारी सांसे जोर जोर फुल रही थी ऐसा लग रहा था जैसे हमारी छाती फट जायेगी।
हमारे होंठ सफ़ेद हो रहे थे तभी उन्होंने हमें रोका और कहा नीचे जमीन पर बैठ जाओ हम बैठे ही थे की तभी उस्ताद ने तेज़ आवाज़ में कहा आगे की तरफ रोलिंग शुरू कर और हम बर्फ के ऊपर रोलिंग करने लगे 15 मिनट तक हम रोलिंग फिर उसके बाद कोहनियों के बल हमें 10 मिनट तक क्रोलिंग करते रहे,-35℃ में भी हमारे कपडे पसीने से भीग गये थे तभी उस्ताद ने हम सबको खड़ा किया और 200 मीटर same चक्कर Go कहा, हम भागे और आके खड़े हो गए तकरीबन 1 घण्टे तक हमारी अच्छी तरीके से खातिरदारी की गयी।
अब हमें Tea Party का इन्तेज़ार था हमें भूख भी लग रही थी और हम एक दूसरे को देख रहे थे तभी उस्ताद की आवाज आई उन्होंने का आप सभी का दुनिया के सबसे ऊंचे बैटल स्कूल में स्वागत है इतना कहते ही उन्होंने हमें अलग अलग टुकड़ियों में बाँट दिया हर टुकड़ी में 12 से 14 जवान थे हम सभी एक ही टुकड़ी में थे, हमें अभी भी Tea Party का इन्तेज़ार था तभी उस्ताद ने जाते वक़्त कहा Tea Party कैसी लगी और कहा जाते समय अपना गिलास साथ ले जाना हम समझ गये थी की 1एक घंटे की जो खातिरदारी हुई है हमारी वही Tea Party थी हमें अपनी गिलास उठाई और बैरक की ओर चल दिए।।
          
               
                                         भाग 6 समाप्त।।
                   (आगे की कहानी के लिए बने रहिये मेरे साथ)

                 अगर कहानी अच्छी लगी तो आगे शयेर कीजिये

             दिनाँक 6 अगस्त 2020    समय  8.00 शाम

                                       रचना(लेखक)

                               अमित सागर(गोरखपरी)

गुरुवार, 6 अगस्त 2020

अगस्त 06, 2020

हिन्दी कहानी सियाचिन ग्लेशियर, एक फौजी की जुबानी भाग 5 Hindi Story Siachen Glacier

                                        हिन्दी कहानी 

                   सियाचिन ग्लेशियर Siachen Glacier

                                            भाग 5

  हम अपना सामान लेके अपने बैरेक में चले गए, वहां बुखारी(रूम हीटर) जल रही थी जिसके कारण बैरेक थोड़ा गर्म था हम सभी ने गुनगुने पानी में अपने हाथों और पैरों को उसमे डूबा दिया और कुछ ही मिनटों में हमें आराम मिल गया हमने रात का खाना खाया और सो गए।
हमें वहां के मौसम में ढलने के लिए अगले दो दिनों तक हमें पूरी तरह आराम करना था और दो दिनों के बाद हमें 5 दिनों का मेडिकल चेकअप भी करना था जो मेडिकल चेकअप में फिट होगा वही ट्रेंनिग कर पायेगा,5 दिनों बाद हमारा मेडिकल चेकअप सुर हुआ और हम सब फिट भी हुए ,ये थी   सियाचिन पोस्ट पहुचने से पहले की हमारी दूसरी चुनौती ।
अगले दिन से एक और चुनौती हमारा इन्तेज़ार कर रही थी 
और वो थी हमारी ट्रेनिंग।
मेडिकल चेकअप के बाद हमने दोपहर का खाना खाया  और हमने अपने स्लीपिंग बैग में पैर डालकर आराम करने ही वाले ही थे कि तभी हमें अचानक खबर मिली की शाम को 4.00 बजे Tea party के लिए ट्रेनिंग ऐरिया में अपना गिलास साथ लेके जाना है हम बहुत खुश हुए ।
उस दिन ठण्ड भी कुछ जादा थी शाम के 3.15 मिनट हो चुके थे और हमें 4.00 बजे पहुचना भी था सभी को ट्रेनिगं ड्रेस में भी बुलाया गया था हम सभी ने अपना ड्रेस पहना और हाथों में Ice Axe(ग्लेशिया में चढ़ने वाला यंत्र)  और पानी का बोतल लिया और हम ट्रेनिग ऐरिया की ओर चल पड़े, हमारे बैरेक से ट्रेनिंग ऐरिया की दूरी लगभग 700 मीटर पर थी शाम के 3.55 मिनट हुए थे जब हम ट्रेनिंग ऐरिया पहुंचे थे।

                                   भाग 5 समाप्त

             (आगे की कहानी के लिए बने रहिये मेरे साथ,)

                 कहानी अच्छी लगी तो इसे शेयर किजिये🙏

           दिनाँक 3 अगस्त 2020   समय 3.55 शाम

                    

                                  रचना(लेखक)

                          अमित सागर(गोरखपरी)

मंगलवार, 4 अगस्त 2020

अगस्त 04, 2020

हिन्दी कहानी सियाचिन ग्लेशियर, एक फौजी की जुबानी भाग 4 Hindi story sachin Glacier

                                      हिन्दी कहानी

                 सियाचिन ग्लेशियर,एक फौजी की जुबानी

                                 Siachen glacier

                                           भाग 4

अगले दिन सुबह 5.30 मिनट हुए थे तापमान -25℃ था हम सभी उठे फ्रेश हुए और नास्ता किया फिर अपने पूरे डोकोमेन्ट के साथ हम MI ROOM पहुचे, ये हमारा दूसरा दिन था यहाँ पे मोबाइल  नेटवर्क बहुत काम था और हम सभी में से किसी ने अपने घर पर ये नहीं बताया था कि हम सियाचिन पोस्ट तैनाती के लिए जा रहे है।
डॉक्टर MI ROOM में आ चुके थे और उस दिन से हमारा  6 दिनों तक मेडिकल चेकअप होना था ।
हमें एक एक करके कमरे में बुलाया जा रहा था  वहाँ की ऊंचाई जादा होने के कारण हम सभी का ब्लडप्रेशर जादा आ रहा था डॉक्टर में हमसे कहा पुरे दिन में कम से कम 5 लीटर पानी पीना होगा तुम सभी को हमने कहा Yes Sir, ये मेडिकल चेकअप 6 दिनों तक चलने के बाद हमें मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट दिया गया , अगले दिन हमें वहां से दुनियां के सबसे ऊंचे बैटल स्कूल भेजा गया, हमें लगभग 150 किलोमीटर का सफर तय करना था हम आगे बढ़ र6उहे थे 150 किलोमीटर दूरी हमने 10 घंटो में पूरी की,इसके बाद का नज़रा देखने लायक था।
शाम के 7 बज चुके थे जब हम दुनियां के सबसे ऊंचे बैटल स्कूल पहुचे,चारो तरफ बर्क की चादर बिछी हुई थी उस वक़्त वहां बर्फबारी शुरू हो चुकी थी और हवा की रफ़्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे से चल रही थी तभी मुख्यद्वार पर लगे बोर्ड पर हमारी नज़र पड़ी,  उस पर लिखा था कि "दुनियां के सबसे ऊंचे बैटल स्कूल में आपका स्वागत है" 
उस वक़्त वहां तापमान -35℃ था हमारे हाथों और पैरों की पुंगलियां सुन्न पड़ चुकी थी और हवा की रफ़्तार से चेहरे और नाक में जलन हो रही थी ।।

                             भाग 4 समाप्त

       (आगे की कहानी के लिए बने रहिये मेरे साथ)




      दिनाँक 3 जुलाई 2020  समय 11.00 सुबह
                             रचना(लेखक)
                     अमित सागर(गोरखपुरी)
    
           

सोमवार, 3 अगस्त 2020

अगस्त 03, 2020

हिन्दी कविता रक्षाबन्धन Rakshabandhan

                                   हिन्दी कविता


                                    रक्षाबन्धन
प्यार और विश्वास से भरा प्यारा बन्धन है ये। 
रंग बिरंगे मिठाइयों से मीठा एहसास है ये।।
मीठे पकवानों और मिष्ठानों का त्यौहार है ये।
रक्षाबंधन है ये रक्षाबन्धन है ये।।
बहनों से कसमे वादों का, प्यारा त्यौहार है ये।
उपहारों और आशीर्वादों का निराला सम्मान है ये।।
कच्ची डोरी से बंधा मजबूत बंधन है ये।
रक्षाबन्धन है ये रक्षाबन्धन है ये।।
भाई बहन के रिश्तों का बड़ा त्यौहार  है ये।
दुआओं में लम्बी उम्र का त्यौहार है ये।।
कलाईयों पे बांध के रंग बिरंगी रेशम की डोरियां।
 रिश्ते को निभाने का त्यौहार है ये।
रक्षाबन्धन है ये रक्षाबन्धन है ये।।
नोक झोक लड़ाई झगड़े भूल जाने का दिन है ये।
प्यार से तिलक लगवाके मिठाई खाने का दिन है ये।।
हर मुश्किल में मै हूँ बताने का दिन है ये।
बहन के पवित्र प्यार की मिशाल है ये।
रक्षबन्धन है ये प्यारा बन्धन है ये।।      

 सियाचिन ग्लेशियर भाग 4 www.amitsagar85.com/2020/08/4-hindi-story-sachin-glacier.html?m=1

घूँघट भाग 1 www.amitsagar85.com/2020/06/veil.html?m=1

दिनाँक 03 अगस्त 2020                     समय  12.20 दोपहर    

 

                                               रचना(लेखक)

                                              सागर गोरखपरी 


शनिवार, 1 अगस्त 2020

अगस्त 01, 2020

हिन्दी कहानी सियाचिन ग्लेशियर, एक फौजी की जुबानी भाग 3 Hindi Story Siachen Glacier

                                  हिन्दी कहानी 

              सियाचिन ग्लेशियर, एक फौजी की जुबानी  

                                Siachen Glacier 

                                        भाग 3

चेन को बार बार हाथों में पकड़ने से हाथों की उंगलियां अकड़ रही थी ऑक्सीजन  रेट 10.9 था जिससे हमें साँस लेने में भी तकलीफ हो रही थी और हम थक रहे थे। लेकिन हम हिम्मत नहीं हारे और आखिर कर हमने बड़ी मुश्किल से चेन को पहिये पे लगा दिया अब ठण्ड से हमारी हालत खराब हो चुकी थी हम किसी तरह गाड़ी में बैठे और गाड़ी चल पड़ी।
आगे का सफर और मुश्किल होने वाला था अब हम 14000 फिट ऊंचाई से 17000 फिट के ऊपर थे। ठण्ड से हमारे गुठने बिल्कुकुल ठन्डे पड़ चुके थे।
हम लगातार आगे बढ़ रहे थे और कुछ ही घंटों में हम दुनियां के सबसे ऊंचे रोड पास खारदुंगला टाप पर थे। जिसकी ऊंचाई 18380 फिट थी और तापमान -35℃  तक था।
हम सभी के सिर भारी हो रहे थे फिर हमने एक बार  पानी पी और आगे बढे और करीब शाम को 7.00 बजे हम अपने बटालियन के अल्फ़ा(A) कंपनी पहुचे,ठण्ड से हम सभी के हाथ और पैर ठन्डे हो चुके थे।
 हमने बाल्टी में हल्का गर्म पानी लिया और उसमें हमने अपने हाथों और पैरों को डूबा दिया,15 मिनट बाद हमारे हाथ पैरों में थोड़ी जान आयी। और फिर हमने रात के भोजन किया और सो गए अगले दिन से हमारे सामने एक और चुनैती आने वाली थी और वो था मेडिकल फिट होना, जो मेडिकल फिट होगा वही आगे की यात्रा तये कर पायेगा।.....

                               भाग 3 समाप्त।।
        (आगे की कहानी के लिए बने रहिये मेरे साथ)

          दिनाँक 30 जून 2020  समय  2.45 दोपहर
                                   रचना(लेखक)
                          अमित सगार(गोरखपरी)

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