Hello friends my name is Amit Kumar Sagar and I am a government employee, with this platform, I will tell my thoughts, my poems, stories, shayari, jokes, articles, as well as my hobbies.

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शुक्रवार, 9 सितंबर 2022

सितंबर 09, 2022

माना की | प्यार पर हिंदी कविता | Love poem in Hindi | सागर गोरखपुरी | लव कविता हिंदी में | मोहब्बत पर कविता हिंदी में | Best love poem in hindi | sagar gorakhpuri ki best kavitayen | आशिकी पर कविता | ब्रेकअप पर हिंदी कविताएं

                                              माना की
माना की मेरे दिन, मेरी रातें,  मेरे पल, सब लौटा दोगे।
पर क्या मेरा वक्त लौटा पाओगे।
मेरा इंतेज़ार, मेरा ख्याल, मेरा ऐतबार, कभी याद कर पाओगे।
या यूँ ही जल्दीबाज़ी में इन्हें चौखट पर छोड़ आओगे।
क्या सच मे तुम मुझे भूल पाओगे।।

माना की मैं गलत था, गलतियां की मैंने। 
क्या अपने गलतियों पर पर्दा डाल पाओगे।
झूठ के सहारे कब तक खुद को समझोगे।
क्या सच मे तुम मुझे भूल पाओगे।।
माना की तुम कहती थी, चल बदल जाएंगे तुम्हारे लिए।
हर मुश्किलात में साथ चलेंगे तुम्हारे लिए।
क्या सच मे उन वादों पर तुम ठहर पाओगे।
या हर बार की तरह झूठी कसमें खाओगे।
क्या सच में तुम मुझे भूल पाओगे।।
माना की हर बार की तरह इस बार भी तुम वक़्त पर आओगे।
मेरे देर हो जाने पर, हक़्क़ से मुझ पर चिल्लाओगे।
क्या मेरे एक इल्तेज़ा पर अपना फैसला बदल पाओगे।
बिना शर्तो के बस एक बार, मेरे घर तक आओगे।
या यूँ ही जल्दी बाज़ी में सारे वादे चौखट पर छोड़ आओगे।
क्या सच मे तुम मुझे भूल पाओगे।।

दिनाँक : 02 सितंबर 2022                    समय : 11: 10 सुबह
                                             रचना(लेखक)
                                            सागर गोरखपुरी

गुरुवार, 8 सितंबर 2022

सितंबर 08, 2022

कभी फुर्सत के पल | ज़िन्दगी पर शायरी | Poem On life | zindagi shayari in hindi | Best shayari on life | शुक्रिया ज़िन्दगी शायरी | ज़िन्दगी शायरी | सागर गोरखपुरी की शायरियां

कभी फुर्सत के पल मिले तो क़रीब आकर बैठ ऐ जिंदगी।
दिया है जो कुछ भी मुझे, उसका हिसाब तो कर ऐ जिंदगी।
तेरा शुक्रगुजार हूं कि तूने मुझे, ज़मीं से आसमां में उड़ने की आजादी दी।
कुछ ख्वाब अधूरे हैं उसे पूरा कर लेने की मोहलत दे ऐ जिंदगी।।


दिनाँक : 06 सितंबर 2022                    समय : 12:03 दोपहर
                                                 रचना(लेखक)
                                                सागर गोरखपुरी

 

शनिवार, 13 अगस्त 2022

अगस्त 13, 2022

फौजी की जुबानी | Peam of soldiers | Sagar Gorakhpuri | फौजी की ज़िंदगी पर कविता | फौजी पर कविता | वीरों पर कविता | देश के जवानों पर कविता | बहादुरी पर हिंदी कविता | त्याग और बलिदान पर कविता | सैनिकों पर कविता

                                     फौजी की जुबानी
तुम्हे ये पता है कि ज़िन्दगी सिर्फ एक मर्तबा मिलती है।
और हम है कि शरहद पर हर रोज जीते और मरते हैं।
बंदूकें ताक़त नही हैं हमारी, हमसफ़र है ये।
एक दूसरे के बिना कहाँ सांसे चलती है।।

मरने जीने का खौप कहाँ किसे है।
हाथों में खुद की जान लिए फिरते हैं।
दस्तक़ देते है हर रोज वहाँ हम।
जहाँ से लौटना थोड़ा मुश्किल है।
हमें जानना हो तो बैठो दो पल साथ कभी।
कैसे शरहद पर हम, हर रोज जीते और मरते है।
बंदूकें ताक़त नही हैं हमारी, हमसफ़र है ये।
एक दूसरे के बिना कहाँ सांसे चलती है।।
हर रोज झूठ का सहारा हम लेते है।
जब जब माँ से बातें करते है।
पता नही उसे अब कहाँ हूँ मैं।
हर रोज पुरानी लोकेशन बताते हैं।
दिल की बीमारी है उसे इस लिए हर बात छिपाते है।
हमें जानना हो तो बैठो दो पल साथ कभी।
कैसे शरहद पर हम, हर रोज जीते और मरते है।
बंदूकें ताक़त नही हैं हमारी, हमसफ़र है ये।
एक दूसरे के बिना कहाँ सांसे चलती है।।
ज़िन्दगी जीने का हुनर हम से बेहतर किसी में नही है।
हर मुश्किल को बड़े शालीके से हम सुलझाते है।
रिश्ते, नाते, दोस्ती, प्यार, सभी को बाखूबी निभाते हैं।
दुश्मन दिख जाये जो शरहद पर फौलाद बन जाते है।
रख दे जो दुश्मन कदम धरा पर विक्रम बत्रा भी बन जाते है।
हमें जानना हो तो बैठो दो पल साथ कभी।
कैसे शरहद पर हम, हर रोज जीते और मरते है।
बंदूकें ताक़त नही हैं हमारी, हमसफ़र है ये।
एक दूसरे के बिना कहाँ सांसे चलती है।।
धरती कहीं बर्फीली है कारगिल कहीं रेगिस्तान है।
हम ही हैं जिनका ह्रदय, कम ऑक्सीजन में भी करता काम है।
अंधी, तूफान सर्दी गर्मी ये सब भी हमसे परेशान हैं।
खड़े हुए हम जब भी जहां भी लौट जाते शैलाब है।
मरने जीने का खौप हमें कहाँ , हम तो दिलों में जिंदा रहते है।
ज़िंदा रहें तो शुर्खियों में, शाहिद हुए तो राजनीति बन जाते हैं।
हमें जानना हो तो बैठो दो पल साथ कभी।
कैसे शरहद पर हम, हर रोज जीते और मरते है।
बंदूकें ताक़त नही हैं हमारी, हमसफ़र है ये।
एक दूसरे के बिना कहाँ सांसे चलती है।।

दिनाँक : 27 जुलाई 2022                      समय : 03:30 दोपहर
                                                 रचना(लेखक)
                                                सागर गोरखपुरी

शनिवार, 6 अगस्त 2022

अगस्त 06, 2022

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                                          लव शायरी 
तेरे जाने पर शोर बहुत था उस वक़्त।
अब गहरे खामोशी में भी शोर बहुत है।
दस्तक़ देती है तू हर रोज़ दिलो दिमाक पर।
पर तेरी बातों का बाहर शोर बहुत है।।
पाप

दिनाँक : 26 जुलाई 2022                        समय : 07: 45 शाम
                         रचना(लेखक)
                  सागर गोरखपुरी

मंगलवार, 26 जुलाई 2022

जुलाई 26, 2022

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                                              लव शायरी
ज़िन्दगी आज कल मुझ पर मेहरबान होकर चल रही है।
जाने क्या बात है वो फिर याद आ रही है।
शायद उसने फिर से याद किया है मुझे दिल से।
एक अरसे बाद मुझे फिर हिचकियाँ आ रही हैं।।

दिनाँक : 10 जुलाई 2022                        समय : 08.35 सुबह
                                                 रचना(लेखक)
                                                सागर गोरखपुरी

शनिवार, 9 जुलाई 2022

जुलाई 09, 2022

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                                                    माँ
"वो रहमत है, वो बरक़त है, घर की वो रौनक है।
मिठास की पुड़िया है ख्वाबों वो की दुनियाँ है।
दुआओं की ताबीज है दुनियाँ में एक तहज़ीब है।
वो वक़्त है थोड़ी सख्त है पर जख्मों वो जैसे मरहम है।
ये कोई और नही बस माँ है।।"

दिनाँक : 09 जुलाई 2022                      समय : 10: 05 सुबह
                                                 रचना(लेखक)
                                                सागर गोरखपुरी

रविवार, 12 जून 2022

जून 12, 2022

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                                                शायरी
"ख्वाबों के जहान में ख्वाब बेशुमार हैं।
ख्वाहिशों के बाजार में रंग हज़ार है।
खुशियों का क्या ये तो सिर्फ वक़्त के मोहताज़ है।
खुद को वक़्त दो, तो ये खूबसूरत बेहिसाब है।।"

दिनाँक : 11 जून 2022                          समय : 80:00 शाम
                                                 रचना(लेखक)
                                                सागर गोरखपुरी



शुक्रवार, 10 जून 2022

जून 10, 2022

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                                         Best Shayari
"ऊँचाइयों पर पहुंच कर ठहरना आसान नही।
अहंकार का कोई रूप, कोई रंग नही।
अक्सर लोग दिल में मैं का घर बना लेते हैं।
तेज़ आँधियों में ऐसे आशियाँ ठहरते नही।।"

दिनाँक : 09 जून 2022                समय : 09:36 सुबह
                                                 रचना(लेखक)
                                                सागर गोरखपुरी

बुधवार, 8 जून 2022

जून 08, 2022

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          प्यार की शायरी
"तेरी दुआओं का असर है कि मैं ज़िंदा हूँ।
वरना लोगों ने मुझे कब का मार दिया।
कुछ तो है हमारे दरमियां ये खुद जाने।
जहाँ से तू छूटा, वहाँ से हम लौटे ही नही।।"

दिनाँक 26 मई 2022                              समय 10.16  सुबह
                
                                                 रचना(लेखक)
                                               सागर गोरखपुरी

सोमवार, 6 जून 2022

जून 06, 2022

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                                                लव शायरी

"सजदा करूँ या फिर इबादत तेरी।
दुआओं में ज़िक्र या फिर जुस्तजू तेरी।
मुझे रहना है हमेशा कुर्बत में तेरी।
हर वक़्त बातें, बस तुझसे तेरी।।"

दिनाँक :04 जून 2022                            समय : 03.15 शाम
                                                 रचना(लेखक)
                                                सागर गोरखपुरी

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लेखक !! Poem on Writer by sagar gorakhpuri !! लेखक पर कविता !! Poem on behalf of All Writer !! लेखक हिंदी कविता !! लेखक पर सबसे अच्छी कविता !!

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