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गुरुवार, 10 सितंबर 2020

सितंबर 10, 2020

हिन्दी आत्महत्या कहानी | खुदकुशी हिन्दी story | love story |

                     Hindi आत्महत्या story

                                  Suicide

                                हिंदी कहानी
                                   खुदकुशी

(ये कहानी काल्पनिक घटना पर आधारित है इसका किसी क्षेत्र,प्रान्त,जाति ,धर्म,और किसी व्यक्ति विशेष को ठेस पहुंचाना मेरा मकसद नही है अगर वास्तविक जीवन मे किसी को ठेस पहुंची हो तो मुझे छमा करे।)
  
स्थान.  -      भोपाल(मध्यप्रदेश) भारत
तारीख -     19 जनवरी 1999
दिन     -       मंगलवार
समय.  -       9.45 शाम
मौसम. -      ठड़ भरा और कोहरा गिरता हुआ।
पात्र     -.     1 भावना तोमर
                  2 वैभव सक्सेना
                 ( भावना के सामने वाले फ्लैट में रहता है)
               
बात उन दिनों की है जब वैभव सक्सेना भिंड(मध्यप्रदेश)के एक छोटे से गांव से निकल कर भोपाल जैसे बड़े शहर में अपनी आगे की पढ़ाई के लिए पहुँचता है वो MBA का छात्र था उसने अपनी मेहनत के दाम पर सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया था उसे मध्यप्रदेश सरकार ने स्कॉलरशिप भी प्रदान किया था जिससे उसके आगे की पढ़ाई हो सके।
भावना एक मध्यवर्गीय परिवार से है और अपने माता पिता के साथ भोपाल में रहती है वो एक ब्रेन कैंसर पेशेंट है उसे खुशी और खुश रहना बेहद पसंद है दुसरो को खुश देखना उनकी मद्दत करना ये उसकी फितरत है उसकी खुद की ज़िंदगी चन्द लम्हो की है पर उसे कोई फर्क नही पड़ता।

वैभव को कई साल हो चुके थे भोपाल में रहते हुए, पर भावना तोमर और वैभव सक्सेना ने एक दूसरे को पहले कभी नही देखा था  इसे सिर्फ हम महज़ इतेफाक ही कह सकतें है दोनों के कमरे आमने सामने थे और  खिड़कियाँ भी बिल्कुल आमने सामने थी एक दिन शाम को भावना अपने बालकनी में बैठकर रोड पर आते जाते लोगों को देख रही थी कि तभी उसकी नज़र वैभव सक्सेना के कमरे पर पड़ती है वैभव अपने कमरे के अन्दर हाथों में किताब लिए इधर उधर टहल रहा था लेकिन उसे कोई फर्क नही था कि कौन उसे खिडकी से देख रहा या नही देख रहा है बस उसकी नज़र किताब पर टिकी हुई थी।
भावना को उसकी सादगी और उसकी स्थिरता दोनों ही भागई थी अब तो भावना तोमर का,रोज का काम था हर शाम अपनी बालकनी में बैठ कर  वैभव सक्सेना की खिड़की की तरफ देखते रहना शायद उसे उस दिन का इन्तेज़ार था जब वैभव सक्सेना उसकी तरफ देखेगा कई महीने हो चुके थे ना तो भावना ने बालकनी में बैठना बन्द किया और नही कभी वैभव सक्सेना ने खिड़की की तरफ देखा ना जाने क्या उम्मीद और लगाओ हो गया था भावना को वैभव से।
 शुरुआत के दिनों में तो भावना की सेहत में काफी सुधार था लेकिन अब उसका कैंसर उस पर हॉबी होने लगा है जिससे उसके सेहत और उसकी तबियत में काफी गिरावट दिखती है अब तो उसे चलने में भी थोड़ी तकलीफ होती है ठंड बढ़ चुकी थी जनवरी का महीना शुरू हो चुका था कोहरा भी कुछ ज्यादा ही गिरने लगा था अब तो वैभव सक्सेना की खिड़की भी ठीक से दिखाई नही देती फिर भी भावना हर शाम उसकी खिड़की को देखा करती थी एक दिन अचानक भावना की नज़र वैभव सक्सेना के कमरे की लाइट पर पड़ती है जो लगातार जल और बुझ रही थी भावना को बड़ी खुशी हुई  उसमें जीने की चाह बढ़ने लगी उसे ऐसा लग रहा था जैसे जीवन मे उमंग सा भर गया हो ।
अगली सुबह भावना ने वैभव सक्सेना को पहली बार नीचे रोड पर जाते हुए देखा था वो थोड़ी जल्दी में दिख रहा था।
भावना की अपेछा से कही जादा वो अच्छा था भावना ने उसे जाते तो देखा था पर वैभव कब आया कुछ पता नही था
शाम हो चुकी थी और भावना बत्ती जलने का इन्तेज़ार कर रही थी शाम के 9.00 बज रहे थे तारीख 16 जनवरी 1999 जब वैभव सक्सेना के कमरे की बत्ती जली धुन्ध बहोत थी इस कारण रोशनी में थोड़ी चमक कम थी पर महससू हो रहा था कि बत्ती जल और भुझ रही है कई घण्टों तक ऐसा ही चलता रहा भावना की भी तबियत भी कुछ ठीक नही थी इस लिए वो भी सोने चली गयी।
अगली सुबह भावना की ताबिताय बिगड़ रही थी उसने अपनी माँ से कहा मुझे बालकनी तक ले चलो भावना की माँ ने उसे बालकनी में बिठा दिया उस दी भावना ने वैभव सक्सेना का बहुत इन्तेज़ार किया पर वैभव ना तों उसे रोड पर दिखा और ना तो वो अपने रूम में था रूम की बत्ती लगातार जल और बुझ रही थी कई घंटे हो चुके थे भावना को वैभव सक्सेना की खिड़की को देखते हुए, उसकी घबराहट अब बढ़ने लगी थी वो अपनी बालकनी से उठी और बिना अपनी माँ को बताए बग़ैर ही वो वैभव सक्सेना के कमरे की तरफ चल देती है माँ ने पीछे से आवाज दी थी पर भावना ने अनदेखा कर दिया था भावना बड़ी मुश्किलों से वैभव सक्सेना के कमरे तक पहुंचती है उसने बहोत देर तक कमरे की घण्टी बजाई दरवाजे और कुंडे को भी खड़खडाय पर अंदर से कोई जबाब नही मिला।
भावना ने दरवाजे को धक्का देने की कोशिस की लेकिन दरवाजा अन्दर से खुला हुआ था जैसे ही उसने कमरे के अंदर प्रवेश किया वो जोर चिल्लाई वैभव सक्सेना उसके सामने पंखे से लड़का हुआ था और उसने खुदकुशी कर ली थी ये देखकर भावना की तबियत बिगड़ने लगी उसे आंखों से धुंधला दिखने लगा था और वो बेहोश हो गयी।
जब भावना की आँख खुली तो वो अस्पताल में थी 9.45 मिनट शाम, 19 अगस्त 1999 दिन मंगलवार माँ सामने खड़ी थी उन्होंने इशारे से भावना से कहा तुम्हारा एक खत आया है जो तुम्हारे सिरहाने रखा हुआ है भावना ने उसे निकाल कर पढ़ने की कोशिस की लेकिन उसे धुंधला सा दिखाई दे रहा था उसने अपनी माँ को पास बुलाया और उनसे पढ़ने को कहा ,माँ ने खत उठाया तो उसमें भेजने वाले का नाम नही था माँ ने लिफाफा खोला और पत्र पढ़ना शुरू किया उसमे पत्र में लिखा था।
" प्यारी "भावना" सबसे पहले तुम मुझे आत्महत्या जैसे अपराध के लिए माफ कर दो तुम्हारे विश्वास पर मैं खरा नही उत्तर सका,आत्महत्या करने का इतने बड़ा फैसला मैने ले तो लिया पर इस समाज की कुरीतियों से मैं लड़ ना सका,मेरी शिक्षा मेरी डिग्रियां मेरा सम्मान मेरी उपलब्धियां ये सब बेकार है इस समाज मे यहाँ सिर्फ दौलत, शोहरत,ऊंची जाति,धर्म, डोनेशन, भ्रस्टाचार से भरा हमार समाज कभी नही समझेगा हमारी मजबूरियां,मैं तुम्हारे घर तक आया था पर तुम्हारी माँ ने मेरी हालत देखकर मुझे तुमसे मिलने से मना कर दिया उनकी कोई गलती नही थी क्योंकि वो भी तो इसी समाज मे रहती है।
मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और ये भी जनता हूँ कि तुम एक ब्रेन कैंसर पेशेंट हो और हर शाम तुम खिड़की पर मेरा इन्तेज़ार करती हो तुम्हारा वक़्त तुम्हारी मुम्मीद नही लौटा पाऊंगा अब हो सके तो मुझे माफ़ कर देना।
    I Love you.....
                                                तुम्हारा अजनबी दोस्त
                                                            "वैभव"
भावना भी सिर्फ 6,7 दिनों की मेहमान थी और उन 6,7 दिनों में उसने कभी वैभव सक्सेना की खिड़की को देखना बंद नही किया आखिर कर एक सप्ताह बाद भावना की भी म्रत्यु हो जाती है।।
                                कहानी समाप्त।।

(इस कहानी में हमने सीखा कि आज भी हमारा समाज वहीं      का वहीं है आज भी कई नवयुवक इस समाज की कुरीतियों से हार कर अपनी जान दे देते और इस कहानी में ये भी पढ़ा कि प्यार किसी भी सामाजिक बंधन को नही मानता।)

   दिनाँक 09 सितंबर 2020  समय 1.44 मिनट दोपहर

                                         रचना(लेखक)

                                      सागर (गोरखपुरी)


मंगलवार, 8 सितंबर 2020

सितंबर 08, 2020

हिन्दी कविता बेरोजगारी | बेरोजगार की व्यथा | Hindi poem Unemployment

                                    बेरोजगारी 

                             Unemployment

दौलत शोहरत नही मैं सम्मान चाहता हूँ।
बेरोजगार हूँ जनाब मैं रोजगार चाहता हूँ।।

थक चुका हूँ मै पन्नो पर लिख लिख कर।
अब थोड़ा शुकुन और आराम चाहता हूँ।
स्कूल,कालेज, विश्वविद्यालय से निजात चाहता हूँ।
मैं बेरोजगार हूँ जनाब रोजगार चाहता हूँ।।
बेजान से शरीर मे मैं अब जान चाहता हूँ।
घुटन भारी ज़िन्दगी में, खुला आसमा चाहता हूँ।
ढेरो डिग्रियों हाथों में है अब उनका मुकाम चाहता हूँ।
मै बेरोजगार हूँ जनाब रोजगार चाहता हूँ।।
उम्र बीत रही है,ढलते उम्र में अब आराम चाहता हूँ।
सारे किताबों को तख्खे पर रख सो जाना चाहता हूँ।
सामाजिक हूँ मैं समाज में सम्मान चाहता हूँ।
मैं बेरोजगार हूँ जनाब रोजगार चाहता हूँ।।
आंखों की झुर्रियां,माथे पर शिकन, झड़ते बाल,उनकी सफ़ेदी,घिसी हुई चप्पलें,पैरों के छाले, वो मिलों का सफर।
इन सभी का हिसाब चाहता हूँ।
मैं बेरोजगार हूँ जनाब रोजगार चाहता हूँ।
माँ का त्याग बाबा की परेशानियां सब हटाना चाहता हूँ।
उनकी ज़िमेदारियाँ अब खुद उठाना चाहता हूँ।
शिक्षित हूँ मै अब शिक्षा का सम्मान चाहता हूँ।
मैं बेरोजगार हूँ जनाब रोजगार चाहता हूँ।।

        दिनाँक 8 सितंबर 2020  समय  11.00 सुबह

     

                                        रचना(लेखक)

                                     सागर (गोरखपुरी)





रविवार, 6 सितंबर 2020

सितंबर 06, 2020

लव मैरेज हिंदी कहानी | लव स्टोरी |Love Marriage Hindi Story | Love Story |

                       हिन्दी लव स्टोरी

                           लव मैरिज

Love Marriage Hindi Story | Love Story

समय -       7 बजे शाम
स्थान -       ग्वालियर
पात्र   -       अनुज,
                 साफिया(अनुज की पत्नी)
                 अंश(अनुज और साफिया का बेटा)
                  अनुज माँ
                  गौरवी( माँ की पड़ोसी)

(ये कहानी पुरी तरह से काल्पनिक है ये सिर्फ मेरी सोच से लिखी हुई कहानी है इससे किसी जाति या मजहब को ठेस पहुंचाना मेरा मक्सद नही है अगर किसी जाति विशेष को कोई भी तकलीफ हुई हो तो छमा करें।)

अनुज ने जब दरवाजा को नोक किया था उस वक़्त शाम के 7 बज रहे थे दरवाजा खुला तो उसकी माँ सामने खड़ी थी अनुज ने झुक के माँ के पैर छूने की कोशिश की थी पर अनुज की माँ ने अपने पैर को पीछे खिंच लिया था और वो भी सिर्फ इस लिए की अनुज ने अपनी मर्जी से एक मुस्लिम लड़की से शादी कर ली थी जिससे वे बहुत प्यार करता था।
कई साल हो चुके थे अनुज को अपने माँ से मिले हुए,अनुज की पत्नी साफिया बहुत दिनों से अनुज को कह रही थी कि जाओ माँ से जाके मिल आओ, इसी ज़िद के कारण ही अनुज, साफिया और अपने बेटे अंश को साथ लेकर माँ से मिलने गया था साफिया ने अपने 5 साल के बेटे को  गोद मे उठा रखा था और दूसरे हाथ में माँ के लिए शायद कुछ उपहार (Gift)ले रखा था साफिया ने अपने बेटे अंश को माँ के पास जाने को कहा और खुद आगे बढ़ के माँ के पैर छूने लगी, माँ ने हल्के हाथों से साफिया को आशीर्वाद दिया।
और नीचे झुक के अंश को अपने सीने से लगा लिया अनुज की माँ की आंखे भर आयी थी साफिया आगे बढ़ के माँ को गले लगाना चाहती थी पर उन्होंने साफिया से कहा इसकी कोई जरूरत नही है उन्होंने अंश को तो अपना लिया था क्योंकि वो अनुज का बेटा था लेकिन  साफिया के लिए अभी भी उनके दिल मे कोई जगह नही थी क्योंकि वो एक मुस्लिम लड़की थी ।
साफिया की आँखे भर आईं थी उसने पीछे मुड़के अनुज की तरफ देखा,अनुज ने साफिया से इशारों में कहा "मैं हूँ न तुम्हारे साथ" तुम परेशान मत हो,साफिया ने अपने आप को संभालते हुए अपने हाथों में लिया हुआ उपहार उसने अंश के हाथों में देते हुए उससे कहा इसे दादी जी को दे दो अंश अपनी छोटी छोटी कदमों से चल कर दादी को साफिया का दिया हुआ उपहार(Gift) दे देता है अनुज की मां अंश के गालों को चूमते हुए उसके हाथों से उपहार(Gift) को ले लेती है।
अनुज की माँ उन्हें अंदर आने को कहती है तभी अनुज ने मां से कहा, नही माँ अब हमें चलना होगा अनुज से साफिया की तकलीफ देखी नही जा रही थी साफिया को भी अजीब सी उलझन हो रही थी उसने अंश को गोद मे उठाया और झुक के माँ के पैर छुए और वो अनुज के साथ अपनी गाड़ी की तरफ चल देती है साफिया की आंखे भर आईं थी अनुज ने उसके कंधे को सहलाया और अपने जेब से रूमाल निकल कर उसके आँशु पोछने लगता है।
सभी गाड़ी में बैठ के अपने घर चले जातें है उधर अनुज की माँ ने भी दरवाजा बंद करके जब साफिया का दिया हुआ उपहार(Gift)खोला तो उनकी आंखों में आँशु आ गये थे। साफिया ने माँ को एक "भागवत गीता" दिया था उस "भागवत गीता" को सीने से लगा के अनुज की माँ रोने लगती है शायद उन्हें अपनी गलती  का एहसास हो चुका था लेकिन उन्होंने साफिया को समझने में थोड़ी से कर दी थी।
 अनुज को सिर्फ 15 मिनट ही हुए थे कि माँ के मोबाइल की घंटी बजती है अनुज की माँ ने फोन उठाया तो उन्हें पता चला की अनुज की गाड़ी का एक्ससीडेंड हो गया है। वो जोर से चीखी तभी उनके पड़ोस में रहने वाली 17 साल की लड़की गौरवी उनके पास पहुँचती है और उन्हें उस अस्पताल ले जाती है जहां अनुज,साफिया और अंश को ले जाया गया है।
अनुज की माँ जब अस्पताल पहुंचती है तो उन्हें अंश और अनुज तो ICU में दिखते है पर साफिया का कोई पता नही था लेकिन जब वो रिसेप्शन पर पहुंचती है तब उन्हें पता चलता है कि साफिया की इस दुर्घटना में मौत हो चुकी है तब उनके होश उड़ जाते है अब वो शायद अपने आपको कभी माफ नही कर पायेंगी।
कुछ दिनों बाद अंश और अनुज अस्पताल से घर आ जाते है अनुज ने अपनी माँ को कभी माफ नही किया और ना ही साफिया के मौत के बाद उसने दूसरी शादी की वो अंश की देख भाल खुद करता है।
‌10 साल हो चुके है साफिया के मौत को, लेकिन अनुज हर रोज घंटो तक साफिया की तस्वीर देखता रहता है।
2 साल पहले ही अनुज की माँ भी चलबसी।।
           
                                कहानी समाप्त।।


इस कहानी में आपने पढ़ा की हम चाहे कितने भी शिक्षित क्यूँ ना हो जाये लेकिन हमारी रूढ़िवादी विचार धारा वहीं की वहीं है हम आज भी जाति,धर्म ,उच्च नीच ,के भेद भाव के जाल से आजाद नही हुए है।

(क्या किसी लड़की या लड़के का हिन्दू ,मुसलमान होना ज़रूरी है या एक अच्छा इंशान, साफिया सिर्फ एक मुस्लिम लड़की थी इस लिए हमने उसे अपनाया नही ,क्या मुस्लिम होना उसका गुनाह था। )


        दिनाँक 05 सितंबर 2020   समय 2.00 दोपहर

                                 रचना(लेखक)

                         अमित सागर(गोरखपुरी)


गुरुवार, 3 सितंबर 2020

सितंबर 03, 2020

Love कविता | सब याद है मुझे | Hindi Poem All remember me

                         हिंदी कविता

 सब याद है मुझे|All remember me   

                                 सब याद है मुझे

तेरी खातिर ज़माने से लड़ता रहा।
हर रोज उन्ही से उलझता रहा।
दुनिया भर की उलझने दिलो दिमाग मे थी।
पर मैं कहता नही था।
 सब याद है मुझे।।

तेरा प्यार , हर मुलाकात, तेरी हर बात।
कुछ भी नही भुला, सब याद है मुझे।
तेरी नेकियां, तेरी बतसलुकियाँ,तेरी गुस्ताखियां।
मुझसे तेरी वो लड़ाइयां भी याद है मुझे।।
मेरी फिक्र, मेरा ख्याल, मेरे कंधो पे तेरा वो हाथ।
वो बिरयानी का स्वाद,चकली में तेरा वो प्यार, बुकनू की चटखार।
मेरे हाथों में तेरा हाथ, कई घण्टों का वो साथ ।
कुछ नही भुला सब याद है मुझे।
पर मैं कहता नही था पर सब याद है मुझे।।
तेरा कई महीनों का वो इन्तेज़ार।
दुआओं में सिर्फ मेरी ही ख्याल।
तेरे दोस्तों से मेरी वो मुलाकात।
सेल्फी लेना तेरा वो हर बार।
तेरी आंखे,तेरे आंखों की वो जुबान सब समझता हूं मैं।
बेखयाली में भी तेरा ही ख्याल रखता हूँ मैं।
कुछ नही भुला सब याद है मुझे।
पर मैं कहता नही पर सब याद है मुझे।।
तेरी शरारतें, तेरी परेशानियां,तेरे आँशु याद है मुझे।
तेरे वादे,तेरी कसमें,तेरी अटखेलियां भी याद है मुझे।
तेरी तकरार,लड़ाई झगड़े तुमसे बेशुमार,मेरी गलतियां।
 सब कुछ याद है मुझे,पर मैं कहता नही।
कुछ नही भुला सब याद है मुझे।।

     दिनाँक  02 सितंबर 2020   समय 5.30 सुबह

                                रचना(लेखक)

                        अमित सागर(गोरखपुरी)

          

मंगलवार, 1 सितंबर 2020

सितंबर 01, 2020

हिन्दी कहानी सियाचिन ग्लेशियर,एक फौजी की ज़ुबानी भाग 13 Hindi Story Siachen Glacier क्या है?

                      हिन्दी कहानी

 सियाचिन ग्लेशियर,एक फौजी की जुबनी

           Siachen Glacier क्या है?

(अभी तक इस कहानी में आपने पढ़ा कि अगले दिन हमें उस सफर का इन्तेज़ार था जिसे पूरी दुनिया मे सिर्फ चन्द लोग ही कर पाते है और हमें गर्व था कि उन चन्द लोगों में हम सब भी शामिल थे )

                                  "अब आगे"

अगले दिन सुबह 6.30 मिनट पर हम सभी अपने पूरे सामान के साथ OP बाबा के मन्दिर पहुचे, माफ कीजियेगा आप सोच रहे होंगे कि ये OP बाबा कौन है आईये मैं आपको बताता हूँ कि कौन है ये "O P बाबा भारतीय सेना के एक बहादुर जवान थे और उन्हें सियाचिन ग्लेशियर में तैनात होने का अवसर मिला उसी दौरान एक ऑपरेशन में O P बाबा वीरगति को प्राप्त हुए तब से लेकर आज तक O P बाबा की आत्मा पूरे सियाचिन ग्लेशियर में पैराह देती है।
सियाचिन ग्लेशियर में जाने वाले या वहां से आने वाला हर एक सैनिक बिना O P बाबा के इज़्ज़ाज़त के बग़ैर यात्रा नही कर सकता है O P बाबा का नाम लेने से ही बड़ी सी बडी बाधा आसानी पर हो जाती है।

हम सभी बाबा के मंदिर में गये वहां सभी ने O P बाबा से अपनी कुशल यात्रा की बिनती की और जोश के साथ O P बाबा का जयकारा लगाया।
उसके बाद हम एक लम्बी कतार में खड़े हो गए  हम सभी ने अपने आपको  एक रस्सी से हुुक कर लिया और चलने को तैयार हो गये इस यात्रा से वापस लौटेंगे की नही इसकी कोई गैरन्टी नही थी। हम सभी के दिल मे अजीब सी उलझन थी पर कोई किसी से कुछ नही कह रहा था।

हम सभी एक दूसरे से गले मिले और अपना 30 kg का रुकसुक  बैग अपने कंधों पर उठाया लिया और हाथ मे Ice Axe लेकर हम आगे बढ़ने लगे उस दिन हमे 12 किलोमीटर की दूरी तय करनी थी सफर शुरुआत से ही मुश्किल भरा था और इन सब के बीच घर की बहुत याद आ रही थी सच कहूं तो घर मे  हमने बताया ही नही था कि हम कौन सी दुनिया की यात्रा पर जा रहे हैं जहां पर थोड़ी सी लापरवाही की सजा सिर्फ मौत हो सकती है हम लगातार आगे बढ़ रहे थे तभी।।.......
                                 भाग 14 समाप्त।     

       (आगे और भी अच्छी बातें है अबतक बने रहिये मेरे साथ)

              दिनाँक 31अगस्त 2020   समय 7.00 शाम

                                         रचना(लेखक)

                                 अमित सागर(गोरखपुरी)



रविवार, 30 अगस्त 2020

अगस्त 30, 2020

तन्हाई पर कविता |तन्हाई with amit sagar | तन्हाई क्या है ? | Hindi मेरी तन्हाई और मैं kavita

           तन्हाई क्या है ?|Hindi तन्हाई पर कविता|

                     तन्हाई with amit sagar.


                                            तन्हाई 

                                       loneliness

तन्हाई खुदा का एक नायब तोहफा है।
किसी को कम किसी को जादा है।।
पढ़ाई की चाह हो या मोहब्बत की राह।
तन्हाई को बहुत कम लोगों ने समझ पाया है।।

तन्हाई बढ़ गई तो मुहब्बत का नशा है
तन्हाई कम हो गयी तो दौलत का नशा है।
तन्हाई ही है जो महब्बू को पास लाती है।
तन्हाई ही है जो सपनों को साकार बनाती है।।
तन्हाई ने हमें बहुत सताया है।
और तन्हाई में बहुत रुलाया है।
तन्हाई में जो रोते है ।
वो गम के मरीज होते है।।
इस गम का कोई इलाज नही ।
क्यूंकि तन्हाई में आवाज नही।।

तन्हाई ना होती तो बहुतों की याद ना होती।
इस लिए तन्हाई हर इंशान के हिस्से में आई है।
किसी ने काम तो किसी ने जादा पाई है।
तन्हाई का अपना अलग ही वजूद है ।
इस लिए तन्हाई ने महफ़िल तन्हाई में सजाई है।।
किसी ने हमसे कहा तन्हाई पर लिखो कुछ।
इस लिए मैं और मेरी तन्हाई ने ।
तन्हाई में हमने कलाम चलाई है।।

                      दिनाँक 20 सितंबर 2006     2.50 दोपहर
      

                                                रचना(लेखक)

                                        अमित सागर(गोरखपुरी)


शुक्रवार, 28 अगस्त 2020

अगस्त 28, 2020

नारी पर कविता | क्या है नारी ? Poem on women What is woman?

                              

                               नारी                             

                        नारी तेरी हर बात निराली है ।
                        इस धारा पर तू है सबसे प्यारी।
                        निर्मल ह्रदय का बास है तुझमे।
                        साहस बेमिशाल है तुझमें।।

                       हर मुश्किल से लड़ने वाली।
                       सबके दिलों में बसने वाली।
                       ममता की तो मिशाल है तू।
                       भाइयों का अनमोल उपहार है तू।।

                                    What is woman

                       बेटी तो कमाल है तू।
                       माँ बाप का अरमान है तू
                       बच्चों की प्यारी माँ है तू।
                       शौहर का गुलेगुल्ज़ार है तू।।

                       ये दुनियां सारी तेरी है।
                       खुला आसमां भी तेरा है।
                       उड़ती है तू अब नील गगन में।
                       ब्रह्मांड भी अब तेरा है।।
                       तलवारों से लड़ती थी कभी ।
                       अब कलम की ताकत हाथ में है।
                       पहुंच सकते है पुरुष जहां पर।
                       पहुँची वहां भी अब नारी है।।

                       गर्व हमें है तुझ पर ऐ नारी ।
                       भाग्य सवारें सबके तुमने ऐ नारी।
                       चाह नही है कभी कुछ खुद के लिए।
                       ऐसी है ये प्यारी नारी।
                                          ऐसी है ये प्यारी नारी।।

                      दिनाँक  28 अगस्त 2020    समय 10.30 रात्रि
        

                                                  रचना(लेख़क)
                                          अमित सागर(गोरखपुरी)

बुधवार, 26 अगस्त 2020

अगस्त 26, 2020

हिन्दी कहानी सियाचिन ग्लेशियर, एक फौजी की जुबानी भाग 12 Hindi story siachen glacier

                             हिन्दी कहानी

                 सियाचिन ग्लेशियर,एक फौजी की जुबानी

                      Hindi story siachen glacier

              सियाचिन ग्लेशियर, एक फौजी की जुबानी

(अभी तक आपने इस कहानी में पढ़ा कि किस तरह हम सभी अपनी ट्रेनिंग खत्म करके तीसरी बार मेडिकल चेकअप के लिए पहुंचे थे)

                                     "अब आगे"

हमें ये मालूम हुआ कि हमारे टुकड़ी के एक जवान का  सफर यहीं पर खत्म हो गया है हमें बड़ी तकलीफ हुई और अन्दर से अजीब सी उलझन महसूस हो रही थी उसके बाहर निकलते ही हम उसके करीब गये उसकी आँखों मे आँशु तो नही थे पर लग रहा था कि अभी उसके आंखों से आँशु निकल जाएंगे हमने उससे कुछ नही पूछा हमें सब मालूम हो चुका था कि चेकअप के दौरान उसका ब्लड प्रेशर 190/110 तक पहुच चुकता और अगर उसने सियाचिन ग्लेशियर का सफर किया तो उसकी जान भी जा सकती थी उसने हमसे कुछ नही बोला और वो बैरेक की तरफ चल पड़ा हममे से किसी ने उसे रोका नही, जब हम अपना चेकअप करके अपने बैरेक पहुंचे तो हम सभी ने उसे बहुत समझाया, वो समझ तो रहा पर उसके दिल की तकलीफ को हम अच्छी तरह समझ रहे थे।

अगली सुबह हम सभी एक कतार में सियाचिन कमान्डर के सामने मुखातिब हुए,कमान्डर हमें सियाचिन ग्लेशियर में होने वाली बहुत सारी परेशानियों,और मुश्किलों के साथ साथ वहां होने वाली दिक्कतों के बारे में हमसे disco's की और आखिर में उन्होंने हमें All the best.और Happy journey कहा और jai hind कहकर चले गए।
अब आगे की जो लड़ाई थी वो ज़िन्दगी और मौत की थी
अगर किसी ने इस सफर में लापरवाही की तो ज़िन्दगी सिर्फ चन्द लम्हो की होगी।

अगले दिन हमें उस सफर का इन्तेज़ार था जिसे पूरी दुनिया मे सिर्फ चन्द लोग ही कर पाते है और हमें गर्व था कि उन चन्द लोगों में हम सब भी शामिल थे ये सफर मुश्किलों भरा था पर दिल मे जो खुशी थी उसे लफ्जों में बयां कर पाना शायद थोड़ा मुश्किल था।

अगले दिन से शुरू होने वाले सफर में एक शख्स की दुआओं और मन्नतों ने मुझे जिंदा बचा लिए ।।

                                    भाग 12 समाप्त।।
               (आगे और भी रोचक बातें है जुड़े रहिये मेरे साथ)

सियाचिन ग्लेशियर भाग 13 www.amitsagar85.com/2020/09/13-hindi-story-siachen-glacier.html?m=1

                  दिनाँक  24 अगस्त 2020   समय  9.45 शाम

                                                रचना(लेखक)

                                        अमित सागर(गोरखपुरी)

सोमवार, 24 अगस्त 2020

अगस्त 24, 2020

हमेशा खुश कैसे रहें How to always be happy | हिंदी आर्टिकल खुश कैसे रहें | |हमेशा खुश कैसे रहें | हिंदी आर्टिकल | खुश रहने के तरीके | जीवन पर आर्टिकल |

                    हमेशा खुश कैसे रहें 

How to always be happy all the time


 How to always be happy all the time

हमेशा कैसे खुश रहें

 ज़िन्दगी किसी सर्कस से कम नही है हर मोड़ पर हमें कुछ नया देखने को और सुनने को मिलता ही रहता है और इन सब के बीच में रहा कर खुश रहना भी एक कला है खुश रहने के लिए हर इंशान का अपना अपना तरीका है और मेरी नज़र में खुशी को लेकर एक अलग विचार है

            खुशी क्या है ?

             what is happiness 

क्या आप ऐसा कभी सोचते है कि क्या है खुशी,कैसी दिखती है ये,कहाँ ढूंढे इसे, अगर इस तरह के विचार या सवाल मन में आते है तो आपको खुशी कभी नही मिल सकती। क्योंकि  खुशी का ना तो कोई रंग है और ना ही कोई रूप, ना ही जाती और ना कोई धर्म ,कभी कभी हम ऐसे इंशान की बातें को सुन कर खुश हो जाते है जिसे हम जानते तक नही और कभी हम अपनो की ही बातों  से ही दुखी हो जाते है। इन दोनों पहलुओं में आपने देखा कि खुश रहने के लिए किसी व्यक्ति विशेष की जरूरत है जिसकी बातें हमारे दिल को छू जाती है उसी की बातों से हम खुश हो जातें है ।

  How to always be happy all the time


 "खुश कैसे रहें"

How to be happy


खुश रहने के लिए हमें किसी चमत्कार की ज़रूरत नही है हमें यह खुद महसूस करना होगा कि हम किस तरह से खुश रह सकते है। हमें कैसे खुश  रहना है हम अपने जीवन में कभी कभी इतने जादा व्यस्त हो जाते है कि छोटी छोटी खुशियों को महसूस ही नही कर पाते और हमेशा बड़ी खुशी की तलाश में रहते है हमें ये पता ही नही चलता कि जिन छोटी छोटी खुशियों को हमने महसूस नही किया वो किसी बड़ी खुशी से कम नही थी।
सच कहूं तो खुशी हमें तब मिलती है जब सब कुछ हमारे According होता है पर क्या ये posible है कि हर वक़्त सब कुछ हमारे According ही हो ये तो कभी नही हो सकता।
जब चीजें हमारे अनुसार नही चलती तब हम दुखी हो जाते है लेकिन चीजें आपके मुताबिक हो या ना हो फिर भी खुश कैसे रहे ये ज़रूरी है आईये जानते है कैसे खुश रहा जाये।

  "हमेशा कैसे खुश रहे"

    "How happy always"

 अगर हमें हमेशा खुश रहना है तो सबसे पहले हमें अपने मन से Negetive(नकारात्मक) सोच को बदल कर positive(सकरात्मक) सोच रखनी होगी क्योंकि नकारात्मक  सोच ही है जो आपकी खुशियों को आप से दूर कर देती है आप जितना ज्यादा सकारात्मक (positive) सोच रखेंगे उतना ही जादा आप अपने आपको खुश महसूस कर पाएंगे,आप वही काम कीजिये जो आपको पसंद हो किस काम को करने से आपको ख़ुशी मिलती है वो वही कीजिए ।
            

  How to always be happy all the time

  "खुशी हमारे अन्दर है"

  Happiness lies in us 

अगर हमें खुश रहना है तो हमें किसी से पूछने की ज़रूरत नही है हम कैसे खुश रहें, अगर हमें ये पूछना है तो सिर्फ अपने दिल से पूछना है कि वो कैसे खुश रह सकता है ।
खुशी और दुख, ये सब हमारे अन्दर बिराजमान है और ये सिर्फ हमें ही ढूंढना है कि हमें क्या चाहिए,हमें ये जानने की ज़रूरत है कि हम कब और किन किन बातों से खुश होते हैं। 
हमारे अन्दर सबसे बड़ी कमी ये होती  है कि हम दूसरों के पीछे भागते है और अपनी छोटी छोटी खुशियों को ठोकर मारते जाते है यही कारण है कि खुशियां हमसे बहुत दूर हो जाती है।

     खुशी को कैसे महसूस करें 

        How to feel happy

किसी को हँसता देख जब आपके चेहरे पे खुद बा खुद मुश्कान आ जाये तो ये खुशी है।
जब हम किसी की मदत करने के लिए जल्दी से आगे बढ़ते है उस वक़्त हमें जो filing होती है उसे खुशी कहते है।
जिस काम को करके हमें अच्छा लगता है उसे खुशी कहते है।
बिना बताए किसी भी काम को अपनी मर्जी से कर लेना खुशी है।

      How to always be happy all the time

  Khush kaise raha jaye

 "खुद के लिए भी जियें"

     Live for yourself too

 मेरी मुलाकात एक ऐसे इंशान से हुई जो सारी उम्र दुसरो की खुशियों के लिए जीता रहा और उसकी अपनी खुशी क्या है ये ओ भूल चुका था अखरी वक़्त में उसने एक बात कही थी कि तुम कभी दूसरों से अपनी खुशी की अपेक्छा मत करो और खुद के लिए जियो तुम हमेशा खुश रहोगे।।

             समाप्त।।


       दिनाँक  24 अगस्त 2020   समय  10.00 रात्रि

                        लेखक

                       अमित सागर(सागर गोरखपुरी)


शनिवार, 22 अगस्त 2020

अगस्त 22, 2020

हिन्दी कहानी सियाचिन ग्लेशियर, एक फौजी की जुबानी भाग 11 Hindi story siachen glacier

                                            हिन्दी कहानी

                        सियाचिन ग्लेशियर,फौजी की जुबानी

                                       Siachen glacier


                 सियाचिन ग्लेशियर,एक फौजी की कहानी


             (अभी तक इस कहानी में आप ने पढ़ा की हमारे कुछ साथी 
                  30 फिट के बर्फ की दीवार के फिसल के कैसे बचें)
                                            "अब आगे"

हमारा पूरा सप्ताह टेस्ट में निकलता रहा और बड़ी अच्छी बात ये थी कि हम सभी एक साथ सारे टेस्ट में पास हुए ये ट्रेनिंग हमारे लिए किसी जंग से कम नही थी जब हम सभी को टेस्ट पास होने की खबर मिली तो सच मे लग रहा था कि हमने कोई जंग फतेह कर ली हो हम सभी बहुत खुश थे ।
ये थी हमारी तीसरी चुनौती जिसने हमे तोड़ कर रख दिया था।
इस ट्रेनिंग के दौरान ही मौसम भी बदल चुका था बर्फ बारी बढ़ चुकी थी और ठंड का तो पूछिये ही मत क्या आलम था इस ट्रेंनिग में हमें कभी कभी ऐसा लगा की अब सब कुछ छोड़ कर कहीं भाग जायें, बर्दाश करने की हमारी  छमता पूरी तरह खत्म हो चुकी थी बहुत तकलीफ भरा सफर था ये 
अगली सुबह से एक और चुनौती अपनी बाहें खोले हमारा इन्तेज़ार कर रही थी।
 और वो था हमारा तीसरा मेडिकल चेकअप, ये चेकअप हमारे सारी मेहनत पर पानी फेर देनेवाला था जो भी इस मेडिकल चेकअप में फेल हुआ उसका सफर यहीं खत्म हो जाएगा,और कुछ हुआ भी ऐसा ही था हमारे साथ, हम सभी का मेडिकल चेकअप शुरू हुआ,हमारी धड़कने डर के कारण तेज धड़क रही थी क्योंकि हम बहुत सारी कठिनाईयों और तकलीफों को पार करके यहां तक पहुंचे थे हम सभी चेकअप में फेल नही होना चाहते थे। मेडिकल चेकअप शुरू हुआ।
 हम सब एक कतार में खड़े थे जिसका नम्बर बुलाया जा रहा था वो अन्दर जा रहा था और जो बाहर कतार में खड़े थे वो अपने अपने भगवान को याद कर रहे थे सिर्फ कुछ ही मिनटों में हमारी टुकड़ी का नम्बर बुलाया गया दो ही मिनट हुए थे कि हमें ये मालूम हुआ कि।।.....
      
                                             भाग 11 समाप्त।।
                           (आगे की कहानी के लिए बने रहिये मेरे साथ)

                          दिनाँक 20 अगस्त 2020   समय 2.00 दोपहर

                                       रचना(लेखक)

                               अमित सागर(गोरखपुरी)


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