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मंगलवार, 19 मई 2020

मै लिखता चला गया

                       मै लिखता चला गया            
हुनर नहीं था मुझमे,कुछ लिखने का।
लोग पढ़ते चले गये,मै लिखता चला गया।
काफिला बनता चला गया,मै लिखता चला गया।
लिखता हूँ क्या मुझे पता नहीं।
लोग पढ़ते चले गये,मै लिखता चला गया।।
       जो सोचता हूँ ,वही लिख देता हूँ अक्सर।
       लोगों को छू जाती ,मेरी यही लेखन।
       क्या छंद है क्या दोहा,मुझे कुछ नहीं समझ।
       जो लिखता हूँ वही लोगों को आ जाती है पसंद।
       हुनर नहीं थी मुझे,कुछ लिखने की।।
चंद लाइनों से शुरू किया था मैंने ये सफर।
अब लिखता हूँ दो चार लाइने बेहतर।
कोशिश करता हूँ मैं,लिखूं और जादा बेहतर।
हर रोज़ सोचता हूँ,कैसे लिखूं बेहतर।।
       इतना पढ़ते हैं सभी,लेखन को अब मेरी।
       लिखता नहीं था कभी मै, मुझे लेखक बना दिया।
       हुनर नहीं था मुझमे,कुछ लिखने की।
       लोग पढ़ते चले गये, मै लिखता चला गया।।


दिनाँक-19मई2020रचना(लेखक)अमितकुमार सागर

समय-11.00 सुबह
                   

 English translate


                I went on writing

 I did not have the skill to write anything in me.

 People went on reading, I went on writing.

 The convoy went on, I went on writing.

 I do not know

 People went on reading, I went on writing.
 I write what I think often.

 My writing would touch people.

 What verses are there, couplets, I don't understand anything

 People like what I write.

 I did not have the skills to write anything.
 I started this journey with few lines.

 Now I write two to four lines better.

 Let me try and write better.

 I think everyday how to write better.
 Everyone studies so much, now my writing.

 I never used to write, made me a writer.

 I did not have the skill to write anything in me.

 People went on reading, I went on writing.




Date-19May2020.   Compositio(Author)  Time - 11.00 am        Amit Kuma Sagar



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